जयपुर में मंगलवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) जैसी प्रक्रिया देश में नई नहीं है, बल्कि कांग्रेस के शासनकाल के दौरान भी पूर्व में 10 बार इस तरह की प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है। राठौड़ के मुताबिक, तब कांग्रेस को यह व्यवस्था लोकतंत्र के अनुकूल लगती थी, लेकिन अब जब 23 साल बाद यह प्रक्रिया फिर हो रही है, तो पार्टी इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बता रही है।
13 करोड़ वोट काटने के दावों पर आंकड़े
मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने तथ्यों के साथ पलटवार किया। उन्होंने कहा कि 13 करोड़ वोट काटने का प्रचार पूरी तरह निराधार और राजनीतिक पाखंड है।
इस सिलसिले में उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन मतदाताओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनमें से 2.80 करोड़ लोगों का निधन हो चुका है, जबकि 6.3 करोड़ मतदाता अपना स्थान बदल चुके हैं। इसके अलावा, एक करोड़ लोगों के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज हैं और करीब 3 करोड़ मतदाताओं का डेटा वेरिफाइड नहीं होने के कारण चिन्हित किया गया है, जिन्हें केवल नोटिस या जांच के दायरे में रखा गया है, उनके नाम सूची से हटाए नहीं गए हैं। राठौड़ ने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस मृत व्यक्तियों और अन्य जगहों पर बस चुके लोगों के वोटों का गलत इस्तेमाल करवाकर चुनावी प्रणाली को प्रभावित करना चाहती है।
इंदिरा गांधी के आपातकाल का जिक्र
यह तीखा बयान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा इंदिरा गांधी को लोकतंत्र से जोड़कर दिए गए बयानों के बाद सामने आया है। गहलोत के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस आलाकमान को खुश करने के लिए इस तरह की बयानबाजी की जा रही है।
उन्होंने पूर्ववर्ती इंदिरा गांधी सरकार के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि जिस दौर में प्रेस की स्वतंत्रता पर पाबंदियां थीं और आपातकाल के दौरान विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया था, उसे लोकतंत्र का आदर्श नहीं माना जा सकता। इसी वैचारिक अंतर को जनता के बीच ले जाने के लिए पार्टी ने 'लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ' अभियान शुरू किया है।
