छिंदवाड़ा शहर के एक निजी लॉन में गौशाला संचालक सम्मेलन एवं गौ सेवा सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जिले भर की गौशाला समितियों के प्रतिनिधियों और गौ सेवा संगठनों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर भटकने वाली निराश्रित गायों की सुरक्षा, उनके चारे-पानी की व्यवस्था और गौशालाओं के संचालन में आ रही अड़चनों का समाधान निकालना रहा।
कार्यक्रम के दौरान आयोजकों ने बताया कि प्रदेश के अलग-अलग संभागों में इस तरह की बैठकें लगातार की जा रही हैं। इसी कड़ी में छिंदवाड़ा में आयोजित इस सम्मेलन में मुख्य रूप से आवारा पशुओं के स्वास्थ्य, उनके सुरक्षित आश्रय और चिकित्सा उपचार को लेकर विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि गौ माता को दर-दर भटकने से बचाने के लिए समाज के हर वर्ग, जनप्रतिनिधियों और संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ आगे आना होगा।
संगठन और संवाद पर जोर
गौशालाओं के संचालन में आ रही प्रशासनिक और वित्तीय कठिनाइयों को दूर करने के लिए एक मजबूत संगठनात्मक ढांचा तैयार करने की पहल की गई है। इस व्यवस्था के जरिए संचालकों की समस्याओं को एक मंच पर लाकर जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि उनका त्वरित समाधान हो सके।
सम्मेलन में मौजूद प्रतिनिधियों ने आम नागरिकों से भी अपील की कि वे बेसहारा पशुओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनें। केवल सरकारी प्रयासों से इन समस्याओं का हल संभव नहीं है, इसके लिए सामाजिक सहभागिता और जन-जागरूकता दोनों बेहद जरूरी हैं।
उत्कृष्ट कार्यों के लिए गौशाला समितियां सम्मानित
समारोह के अंतिम चरण में जिलेभर में सराहनीय कार्य कर रही विभिन्न गौशाला समितियों को सम्मानित किया गया। आयोजकों ने इन समितियों के प्रतिनिधियों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न भेंट कर उनका हौसला बढ़ाया।
कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि भारतीय संस्कृति में पूजनीय गौ माता की सेवा केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का सामूहिक कर्तव्य है। जब तक हर बेसहारा पशु को सुरक्षित आश्रय और समय पर चारा-चिकित्सा नहीं मिलती, तब तक ऐसे आयोजनों का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।
