इंदौर में भागीरथपुरा मामले में लापरवाही के बाद अब स्वास्थ्य विभाग नगर निगम और जिला प्रशासन पूरी तरीके से मुक्ति नजर आ रहा है बताया जा रहा है कि वार्ड क्रमांक 16 के महावीर नगर में दूषित पानी की जानकारी मिली थी जिसमें बताया जा रहा था कि एक बोरवेल मैं लीकेज के कारण गंदा पानी लोगों के घर तक पहुंचा था लेकिन उसको लेकर समस्या हल कर दी गई है तो वही स्वास्थ्य अधिकारी माधव हसनी का कहना था की जानकारी लगते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम के द्वारा स्कैनिंग का काम किया गया है जिसमें करीबन 85 से अधिक घरों को चिन्हित किया गया था लेकिन किसी को भी उल्टी दस्त जैसी कोई गंभीर बीमारी नहीं हुई है प्रारंभिक तौर पर उन्हें इतिहास के लिए दवाई उपलब्ध कराई गई है साथ ही पानी में मिलने वाली दवाई भी दी गई है और कटे-फटे फल न खाने के साथ ही शुद्धता और पानी उबाल कर पीने को कहा है और क्षेत्र के पानी के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। नगर निगम के माध्यम से शुद्ध पानी के टैंकर उन घरों को भी उपलब्ध कराए गए जहां पर दूषित पानी को लेकर बात सामने आ रही थी डॉक्टर का कहना है कि एक बच्चों की बीमारी से जुड़ा हुआ मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था वह बच्चे अन्य बीमारी से ग्रसित है जिसका इलाज चाचा नेहरू हॉस्पिटल में चल रहा था गंदे पानी से किसी तरह की उसे समस्या नहीं थी और वह मूल रूप से गुजरात के रहने वाले दंपति का बच्चा था जिसे वह गुजरात अपने साथ लेकर रवाना हो गए और यदि किसी भी स्थान से दूषित पानी की शिकायत मिलती है तो तुरंत हमारे स्कैनिंग टीम वहां पर पहुंचकर जायज रहती है लेकिन कहीं ना कहीं वार्ड क्रमांक 16 के महावीर नगर से लोगों की आवाज होती थी और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें बोरवेल में गंदा पानी मिलता हुआ नजर आ रहा था।