राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर में भारत-पाक सीमा पर नशे की तस्करी के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने हाईटेक निगरानी व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। पाकिस्तान से लगी  करीब 1070 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लंबे समय से सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील रही है, लेकिन अब तस्करी के तौर-तरीकों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक रास्तों और मानव नेटवर्क की जगह अब ड्रोन, जीपीएस लोकेशन और एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों का इस्तेमाल तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। इनसे निपटने के लिए बीएसएफ, भारतीय वायुसेना, स्थानीय पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां एंटी-ड्रोन सिस्टम, अत्याधुनिक निगरानी उपकरणों और मजबूत खुफिया नेटवर्क की मदद से लगातार कार्रवाई कर रही हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक  वर्ष 2024 में पंजाब सीमा पर 294 ड्रोन जब्त किए गए थे, जबकि 2025 में अब तक 272 ड्रोन, 367.8 किलोग्राम हेरोइन और 19 किलोग्राम आईसीई ड्रग बरामद की जा चुकी है। दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र की विश्व ड्रग रिपोर्ट 2025 के मुताबिक दुनिया में 31.6 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी अवैध नशीले पदार्थ का सेवन कर रहे हैं, जिससे यह समस्या वैश्विक स्तर पर भी लगातार गंभीर बनती जा रही  है। ऐसे में राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। साथ ही युवाओं को नशे से दूर रहने, समाज को जागरूक बनाने और नशे की तस्करी से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को देने की अपील की  जा रही है।