गणेशोत्सव को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए बुरहानपुर में श्री वृहद गुजराती समाज ने अनूठी पहल शुरू की है। समाज पिछले 8 वर्षों से लोगों को मिट्टी से बनी ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं की स्थापना के लिए प्रेरित कर रहा है। इस बार भी जिलेभर के अधिक से अधिक घरों में मिट्टी के गणेश विराजित कराने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि इन प्रतिमाओं का विसर्जन घर में ही पौधों के बीच किया जा सकेगा।

श्रद्धालुओं के लिए खास संदेश

श्री वृहद गुजराती समाज द्वारा करीब दो फीट तक ऊंची मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। समाज का उद्देश्य पीओपी की प्रतिमाओं से होने वाले जल और पर्यावरण प्रदूषण को कम करना है। श्रद्धालुओं को संदेश दिया जा रहा है कि अनंत चतुर्दशी पर प्रतिमा का विसर्जन घर में ही करें। इसके लिए बिल्वपत्र, शमी और पारिजात जैसे पौधों में विसर्जन को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है।

ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा के लिए प्रेरित

अभियान में समाज द्वारा संचालित पटेल रतिलाल बोरिवाला स्कूल के विद्यार्थियों को भी जोड़ा जा रहा है। विद्यार्थियों को मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा बनाने और घर में स्थापित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। बुरहानपुर के अलावा खंडवा, इंदौर, खरगोन और महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं की मांग सामने आ रही है"ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं समाज भवन से न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। हमारा उद्देश्य है कि गणेशोत्सव की आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी घर-घर पहुंचे और अधिक से अधिक लोग मिट्टी के गणेश की स्थापना करें।"