सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी दिवस के अवसर पर सोमवार (14 सितंबर 2026) को एक नई सार्वजनिक सूचना सेवा 'जन सूचना सेवा' की शुरुआत की है। इस नई पहल का उद्देश्य देश के आम नागरिकों और मुकदमों से जुड़े पक्षों के लिए न्याय प्रक्रिया को अधिक सुलभ और समावेशी बनाना है।

इस सेवा के तहत सुप्रीम कोर्ट के चुनिंदा महत्वपूर्ण फैसलों और आदेशों के सरल हिंदी सारांश उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा, 15 से 30 मिनट के हिंदी ऑडियो और वीडियो बुलेटिन भी जारी किए जाएंगे, जिससे कानूनी भाषा की पेचीदगियों को आम आदमी तक आसानी से पहुंचाया जा सके।

दिव्यांगों और आम लोगों को मिलेगी राहत

शीर्ष अदालत द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह पहल आम नागरिकों, वादकारियों और विशेष रूप से दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए शुरू की गई है। इसके माध्यम से लोग अपनी परिचित भाषा में महत्वपूर्ण फैसलों, उनके प्रभावों और आगे की कानूनी कार्रवाइयों को आसानी से समझ सकेंगे।

न्यायालय का मानना है कि लंबे और जटिल कानूनी दस्तावेजों को पढ़ने या समझने में कठिनाई महसूस करने वाले लोगों के लिए ऑडियो और वीडियो फॉर्मेट बेहद मददगार साबित होंगे। इसका मकसद भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान को न्यायिक जानकारी के प्रसार से जोड़ना है।

अन्य भारतीय भाषाओं में भी होगा विस्तार

फिलहाल इस सेवा की शुरुआत हिंदी भाषा के साथ की गई है, लेकिन जल्द ही इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराने की योजना पर काम शुरू किया जाएगा।

इस व्यवस्था के लागू होने से देश के विभिन्न भाषाई क्षेत्रों के नागरिक सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसलों से जुड़ी संक्षिप्त और आसान जानकारी अपनी मातृभाषा में हासिल कर सकेंगे।