सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर के कमर्शियल इलाकों में चल रहे कोचिंग संस्थानों को लेकर जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) से जवाब तलब किया है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर. महादेवन की बेंच ने सुनवाई के दौरान नाराजगी जताई कि अलग से बहुमंजिला भवन बनने के बावजूद कोचिंग संस्थान व्यावसायिक क्षेत्रों से संचालित हो रहे हैं। अदालत ने JDA को निर्देश दिया है कि वह तीन हफ्ते के भीतर उठाए गए कदमों की रिपोर्ट पेश करे।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि जिन भवनों का निर्माण कोचिंग संस्थानों को शिफ्ट करने के लिए किया गया था, उनका आवंटन दूसरी संस्थाओं को किया जा रहा है। इस पर बेंच ने साफ किया कि ऐसे आवंटन मान्य नहीं होंगे और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला ही सर्वोपरि होगा। तब तक इन भवनों पर किसी भी संस्था को स्थायी अधिकार नहीं मिलेगा।
मास्टर प्लान उल्लंघन और अतिक्रमण पर चिंता
मामले की सुनवाई के दौरान जयपुर के मास्टर प्लान से जुड़े गंभीर मुद्दे भी उठे। अदालत को जानकारी दी गई कि कई जगहों पर तय भूमि उपयोग के विपरीत अन्य गतिविधियों का संचालन हो रहा है। इसके अलावा लोगों की ओर से JDA को सौंपी गई जमीन का सही इस्तेमाल न होने और कई इलाकों में अतिक्रमण की शिकायतें भी सामने आईं। कोर्ट ने इन गड़बड़ियों को चिंताजनक बताया।
इसके साथ ही JDA से जुड़े अपीलीय मामलों में हो रही देरी पर भी अदालत ने सख्त रुख अपनाया। बेंच ने अपीलीय प्राधिकरण को निर्देश दिया कि ऐसे सभी मामलों का निपटारा दो हफ्ते के भीतर किया जाए। इस तय समयसीमा का कड़ाई से पालन कराने की जिम्मेदारी संबंधित पीठासीन अधिकारी की होगी।
क्या है पूरा मामला
यह पूरा प्रकरण एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) में दिए गए आवेदन पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि शहर में भूमि उपयोग और बिल्डिंग बायलॉज के नियमों का पालन नहीं हो रहा है, जबकि मास्टर प्लान का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी प्रशासनिक कार्रवाई का अभाव है। इससे पहले 25 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट इस मामले के दायरे को देशव्यापी बना चुका है और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को इसमें पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं।
