जयपुर के धावास इलाके में एक मकान मालिक ने अपने ही मकान पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप लगाया है। मकान मालिक रामस्वरूप चौधरी का कहना है कि उन्होंने अपने परिचित अधिवक्ता ओमप्रकाश सोलंकी को मरम्मत कार्य के चलते कुछ दिनों के लिए मौखिक अनुमति देकर घर में रहने दिया था, लेकिन 8 से 9 महीने बीत जाने के बाद भी वकील ने मकान खाली करने से इनकार कर दिया है।
यह पूरा मामला करणी विहार थाना क्षेत्र के हीरापुरा पावर हाउस के पीछे स्थित नर्बदा नगर का है। पीड़ित रामस्वरूप चौधरी ने पुलिस और प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर अपनी संपत्ति का कब्जा वापस दिलाने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला
रामस्वरूप चौधरी का प्लॉट संख्या C-42, नर्बदा नगर में मकान स्थित है। उनके मुताबिक, करीब 8-9 महीने पहले उनके एक किराएदार से विवाद हुआ था। इस कानूनी मामले में सहायता के लिए उन्होंने अपने पूर्व परिचित अधिवक्ता ओमप्रकाश सोलंकी को वकील नियुक्त किया था।
पीड़ित के अनुसार, वकील ने अपने खुद के मकान में व्हाइटवॉश और मरम्मत का काम चलने का हवाला दिया और कुछ दिनों के लिए परिवार समेत रहने की अनुमति मांगी। पूर्व परिचय और विश्वास के आधार पर रामस्वरूप ने बिना किसी लिखित अनुबंध या किरायानामे के केवल दो-चार दिन के लिए अस्थायी तौर पर मौखिक इजाजत दे दी थी।
मकान खाली करने से इनकार और धौंस जमाने का आरोप
रामस्वरूप चौधरी का आरोप है कि तय समय बीतने के बाद जब उन्होंने मकान खाली करने को कहा, तो अधिवक्ता ने घर खाली करने से साफ मना कर दिया। इतना ही नहीं, वकील साहब विभिन्न स्थानों पर उक्त मकान को अपना बताकर मालिकाना हक जता रहे हैं और स्वामित्व का कोई वैध दस्तावेज भी पेश नहीं कर रहे हैं।
पीड़ित ने आरोप लगाया है कि जब भी वे अपने मकान पर जाते हैं या खाली कराने का दबाव बनाते हैं, तो घर की महिलाओं को आगे कर विवाद खड़ा कर दिया जाता है। साथ ही, पेशे से वकील होने का प्रभाव दिखाकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। इस पूरी घटना के बाद से मकान मालिक और उनका परिवार गहरी मानसिक पीड़ा से गुजर रहा है।
पुलिस और प्रशासन से मदद की गुहार
अपनी ही संपत्ति पर कब्जा पाने के लिए संघर्ष कर रहे रामस्वरूप चौधरी ने शासन और पुलिस प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने दस्तावेजों की जांच कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है ताकि उन्हें और उनके परिवार को अपनी संपत्ति का आधिपत्य पुनः मिल सके।
