Sunday, 25 October 2026
अभी का दौर

कार्तिक पूर्णिमा आज: 16 कलाओं से परिपूर्ण चंद्रमा की रोशनी में रखी जाएगी खीर, जानें निशिता मुहूर्त और पूजा का समय

संक्षेप में

कार्तिक पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने का सबसे शुभ समय रात 11:40 से 12:31 (निशिता मुहूर्त) है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होकर अमृत वर्षा करता है, जिसे खीर में समाहित किया जाता है।

मुख्य बातें

  • निशिता काल का समय रात 11:40 से 12:31 तक रहेगा
  • शुभ चौघड़िया शाम 5:42 से 7:18 तक है
  • अमृत चौघड़िया शाम 7:18 से 8:54 तक रहेगा
  • इस तिथि को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है
धर्म
कार्तिक पूर्णिमा आज: 16 कलाओं से परिपूर्ण चंद्रमा की रोशनी में रखी जाएगी खीर, जानें निशिता मुहूर्त और पूजा का समय

हिन्दू पंचांग के अनुसार, आज कार्तिक पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इस खास रात में चंद्रमा अपनी पूरी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और आकाश से अमृत वर्षा करता है। इस रात को लेकर परंपरा है कि दूध और चावल से तैयार खीर को चांदनी रात में रखा जाता है, ताकि उसमें चंद्रमा की किरणें समा सकें और वह अमृत तुल्य बन जाए।

इस साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन कई लोग असमंजस में हैं कि शरद पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा को लेकर क्या मान्यताएं हैं, क्योंकि इस तिथि पर विशेष पूजा-अर्चना और जागरण का विधान है।

खीर रखने का सही समय और निशिता मुहूर्त

चांदनी रात में खीर रखने के लिए सही समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, आज रात 11 बजकर 40 मिनट से निशिता काल का आरंभ होगा, जो रात 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। यह अवधि खीर को खुले आसमान के नीचे रखने के लिए सबसे उपयुक्त मानी गई है।

परंपरा के अनुसार, खीर को किसी साफ मलमल या सूती कपड़े से ढककर रखना चाहिए, जिससे चंद्रमा की किरणें उस तक आसानी से पहुंच सकें और किसी तरह के कीट या धूल कण भी न गिरें।

पूजा के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त

कार्तिक पूर्णिमा की संध्या पर मां लक्ष्मी और भगवान सत्यनारायण की उपासना का विशेष महत्व है। प्रदोष काल में पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

आज शाम की पूजा के लिए दो विशेष चौघड़िया मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं:

  • शुभ चौघड़िया: शाम 5 बजकर 42 मिनट से 7 बजकर 18 मिनट तक।
  • अमृत चौघड़िया: शाम 7 बजकर 18 मिनट से रात 8 बजकर 54 मिनट तक।

इन दोनों मुहूर्तों में गृह मंदिर में घी का दीपक जलाकर मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करना फलदायी माना गया है।

मां लक्ष्मी की आराधना और कोजागरी परंपरा

इस पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है। ऐसी लोक मान्यता है कि इस रात्रि को मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक का भ्रमण करती हैं और यह देखती हैं कि कौन भक्त उनकी आराधना में लीन है। इसी वजह से कई जगहों पर लोग रातभर जागकर जागरण करते हैं और मां लक्ष्मी को खीर, मौसमी फल व मिठाइयां अर्पित करते हैं। इसके अलावा, इस पावन अवसर पर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने और हवन करने का भी विधान है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कार्तिक पूर्णिमा की रात खीर रखने का क्या महत्व है?

मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत वर्षा करता है। इस रोशनी में खीर रखने से वह अमृत तुल्य बन जाती है, जिसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

चांदनी रात में खीर रखने का सबसे शुभ समय कौन सा है?

निशिता मुहूर्त खीर रखने के लिए सबसे उत्तम माना गया है, जो रात 11:40 बजे से शुरू होकर 12:31 बजे तक रहेगा।

कार्तिक पूर्णिमा की पूजा के लिए शाम के शुभ मुहूर्त क्या हैं?

संध्याकाल में पूजा के लिए शुभ चौघड़िया शाम 5:42 से 7:18 तक और अमृत चौघड़िया शाम 7:18 से 8:54 तक रहेगा।

कोजागरी पूर्णिमा पर किसकी पूजा की जाती है?

कोजागरी पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी और भगवान सत्यनारायण की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी भ्रमण पर निकलती हैं।