राजधानी में बढ़ते वाहनों के दबाव और आए दिन लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण ने बड़ा कदम उठाया है। जेडीए की प्रोजेक्ट्स वर्क कमेटी से वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद, चालू वित्तीय वर्ष में ही शहर के तीन प्रमुख मार्गों पर बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू होने जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से सरदार पटेल मार्ग, गोपालपुरा बाईपास और जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर आवागमन सुगम होगा।
सरदार पटेल मार्ग पर राजमहल पैलेस अंडरपास
राजमहल पैलेस के पास यातायात के दबाव को नियंत्रित करने के लिए जेडीए ने अंडरपास के निर्माण की तैयारी पूरी कर ली है। प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के टेंडर दस्तावेज तैयार हो चुके हैं और नवंबर में इसका वर्क ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा। दिसंबर से मौके पर निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
गोपालपुरा बाईपास अंडरपास और JLN मार्ग सिग्नल-फ्री कॉरिडोर
गोपालपुरा अंडरपास के लिए प्रोजेक्ट्स वर्क कमेटी से बजट मंजूर होने के बाद प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जनवरी की शुरुआत तक इस प्रोजेक्ट का टेंडर पूरा कर वर्क ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा और फरवरी 2027 से जमीनी स्तर पर काम शुरू होगा। जेडीए के अधिकारियों का कहना है कि सरदार पटेल मार्ग और गोपालपुरा अंडरपास का निर्माण कार्य अगले 8 से 12 महीनों तक समानांतर चलेगा, जिससे तय समयसीमा में काम पूरा हो सके।
वहीं, शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में शुमार JLN मार्ग को पूरी तरह सिग्नल-फ्री बनाने की योजना को फास्ट-ट्रैक पर डाल दिया गया है। 'स्कूल फॉर प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर' ने इंडियन रोड्स कांग्रेस के विशेषज्ञों के साथ मिलकर इसका प्लान तैयार किया है। जेडीए ने फिजिबिलिटी रिपोर्ट के लिए कंसल्टेंसी नियुक्त कर दी है, जिसकी रिपोर्ट जनवरी की शुरुआत तक मिलने की उम्मीद है। इसके बाद फंड मंजूर कर टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे और मार्च तक प्रोजेक्ट की शुरुआत होगी।
क्यों जरूरी हैं ये तीनों प्रोजेक्ट्स?
जेडीए के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सिविल लाइन्स ओवरब्रिज (RoB) के इसी साल के अंत तक शुरू होने से सरदार पटेल मार्ग पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाएगा। इसी तरह, गोपालपुरा RoB को गुर्जर की थड़ी से जोड़ने वाली प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के बनने से बाईपास पर ट्रैफिक लोड कई गुना बढ़ जाएगा। हालांकि गोपालपुरा RoB के निर्माण में करीब 30 महीने लगेंगे, लेकिन नए अंडरपास इस भविष्य के दबाव को आसानी से संभाल लेंगे। इन तीनों परियोजनाओं के समय पर धरातल पर उतरने से न सिर्फ सफर आसान होगा, बल्कि ईंधन और समय दोनों की बचत होगी।
