छिंदवाड़ा में 'स्वच्छता ही सेवा 2026' अभियान के तहत बच्चों ने रचनात्मकता की मिसाल पेश की है। मॉडल फ्यूचर संस्था द्वारा संचालित टी-वर्ल्ड स्कूल और प्रेरणा नगर विकास प्रस्फुटन समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों ने कबाड़ से कमाल करते हुए कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने का संदेश दिया।
संस्था प्रमुख आयशा लोधी के मार्गदर्शन में हुए इस आयोजन में बच्चों ने महंगे सजावटी सामान की बजाय पूरी तरह वेस्ट मटेरियल का इस्तेमाल किया। पुराने अखबारों से 'स्वच्छता', सीड बॉल (बीज गोलियों) से 'सेवा' और 'पखवाड़ा' शब्द उकेरे गए, जबकि सूखे फूलों की पंखुड़ियों और पेड़ों की पत्तियों से '2026' लिखकर एक नया संदेश दिया गया। बच्चों की इस पहल ने यह साबित किया कि सही सोच और पृथक्करण के जरिए बेकार समझे जाने वाले कचरे को भी दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
चार डस्टबिन के जरिए समझाया कचरा प्रबंधन
दैनिक जीवन और व्यवहार में स्वच्छता को उतारने के लिए बच्चों ने चार अलग-अलग रंगों के डस्टबिन का प्रदर्शन भी किया। इसके माध्यम से आम लोगों को गीला कचरा, सूखा कचरा, सेनेटरी कचरा और अन्य श्रेणियों के कचरे को अलग-अलग रखने और उनके वैज्ञानिक निस्तारण की जानकारी दी गई।
इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों के जरिए स्वच्छता के संदेश को परिवार और समाज के हर कोने तक पहुंचाना था। आयोजकों का मानना है कि कचरे का उचित प्रबंधन केवल नगर निगम या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की रोजमर्रा की आदत का हिस्सा होना चाहिए।
स्वच्छता चैंपियनों ने बढ़ाया हौसला
कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता चैंपियन शैलेंद्र उज्जवने ने बच्चों की इस रचनात्मक कला का मुआयना किया और उनका उत्साहवर्धन किया। इस मौके पर विद्यालय के मोहम्मद इस्माइल कुरैशी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हमेशा बड़े और खर्चीले प्रोजेक्ट्स की जरूरत नहीं होती। अखबार, सूखे फूल, पत्तियां और मिट्टी की सीड बॉल जैसी साधारण चीजें भी समाज को बड़ा संदेश दे सकती हैं।
संस्था प्रमुख आयशा लोधी ने कहा- "सोच बदलेगी, तो कचरे की तस्वीर भी बदलेगी।" बच्चों की इस पहल ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि कचरा समस्या तब बनता है जब हम उसे फेंकने की चीज मानते हैं, जबकि रचनात्मक सोच के साथ वही कचरा संसाधन बन जाता है।
