मध्यप्रदेश में हुई तेज बारिश के बाद खोखी नदी में आए उफान से खोखी बांध के दो ब्लॉक टूट गए। पानी के तेज दबाव के चलते बांध के 7 ब्लॉक में से 2 ब्लॉक पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर टूटने से बड़ी मात्रा में पानी आसपास के खेतों में पहुंच गया। इससे करीब 300 से 400 बीघा कृषि भूमि में खड़ी फसलें जलमग्न हो गईं और किसानों को भारी नुकसान की आशंका है।ग्रामीण प्रहलाद ने बताया कि तेज बारिश के बाद खोखी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और बांध पर पानी का दबाव बढ़ गया। इसके बाद बांध के दो ब्लॉक टूट गए और पानी तेजी से खेतों की ओर फैल गया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में खेत पानी में डूब गए तथा खड़ी फसलें जलमग्न हो गईं।
किसानों का आरोप है कि बांध के क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थिति को लेकर संबंधित विभाग को पिछले कई वर्षों से शिकायतें दी जा रही थीं। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते बांध की मरम्मत कर दी जाती तो इस स्थिति से बचा जा सकता था। अब बांध टूटने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है।

बांध सुरक्षा को लेकर भी उठे सवाल

खोखी बांध को बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 के तहत निर्दिष्ट बांध के रूप में दर्ज किया गया है। ऐसे बांधों के निरीक्षण, जांच, सुरक्षित संचालन एवं रखरखाव के लिए कानून में विशेष प्रावधान हैं। ऐसे में बांध के क्षतिग्रस्त होने के बाद पूर्व में किए गए निरीक्षण, रखरखाव तथा ग्रामीणों की शिकायतों पर हुई कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन एवं जल संसाधन विभाग से बांध की तत्काल मरम्मत कराने, प्रभावित क्षेत्र में फसलों के नुकसान का सर्वे करवाने तथा किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।