छिंदवाड़ा: हिंदू धर्म का सबसे बड़ा महीना सावन के महीने की शुरुआत 30 जुलाई से होने वाली है, जो 28 अगस्त यानि रक्षाबंधन तक चलेगा. सावन के महीने में भगवान की शिव की पूजा-अराधना और अभिषेक होता है. इस दौरान श्रद्धालुओं द्वारा कांवड़ यात्रा भी निकाली जाती है. सावन महीने की शुरुआत होते ही फल-फूल, बेलपत्र और धतूरा की मांग बाजार में जोर-शोर से बढ़ जाती है. लिहाजा मांग बढ़ती देख धतूरा के दाम भी बढ़ने लगे हैं.

साल भर जिस पौधे को जंगली पौधा समझा जाता है. वही पौधा सावन के महीने में ऑन डिमांड रहता है, क्योंकि उस पौधे को भगवान महादेव का प्रिय माना जाता है. हम बात कर रहे हैं, धतूरा की. सावन सोमवार के आते ही चारों तरफ हर हर महादेव और बम-बम भोले की गूंज सुनाई देने लगती है. इस बार सावन सोमवार का पावन महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है. जिसमें 4 सावन सोमवार पड़ेंगे, जिसमें पहला सावन का सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा.

छिंदवाड़ा के बाजारों में धतूरों की बिक्री 
जिन फूल बेचने वालों के पास ज्यादातर वक्त गुलाब और गेंदा खरीदने वालों की भीड़ लगी रहती है, सावन आते ही उन्हीं दुकानदारों के पास गुलाब, गेंदा और कमल के फूल की बिक्री कम हो जाती है, क्योंकि इन दिनों बेलपत्र और धतूरा की डिमांड ज्यादा होती है. सावन सोमवार में खासतौर पर बाजार में ऐसे फूल की मांग होती है, जिसे साल भर कचरा समझ कर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. यही पौधा इन दिनों छिंदवाड़ा के बाजार में खूब बिक रहा है. सावन को देखते हुए धतूरा और बेलपत्र की दुकानें लगना शुरू हो गई.

भगवान शिव को क्यों प्रिय है धतूरा

भगवान भोलेनाथ की पूजा और अभिषेक में धतूरा बहुत अहम माना जाता है. भगवान शिव को धतूरा जरूर अर्पित किया जाता है. इसकी एक पौराणिक वजह है. पंडित सुनील दुबे कहते हैं कि "ऐसा कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान जो हलाहल यानि विष निकला था, वो भगवान शिव ने पिया था. उस हलाहल विष की गर्मी और प्रभाव को शांत करने के लिए भगवान शिव को धतूरा और भांग जैसी औषधियां अर्पित की गई थी. इसलिए महादेव को धतूरा प्रिय माना जाता है.


गरीबों के लिए आजीविका का बड़ा सहारा

सावन का महीना आते ही धतूरा की मांग बहुत तेजी से बढ़ती है, जिसके चलते बाजारों में धतूरे के फूल की कीमत आसमान छूने लगती है. जहां आमतौर पर मुफ्त में मिलने वाला एक धतूरा या उसका फूल सावन के महीने में लगभग ₹10 से ₹50 तक में बिकता है. छिंदवाड़ा और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में पूजन के फूल बेचकर कई गरीब परिवार अपनी अजीविका चलाते हैं. ग्रामीण जंगलों से धतूरे को चुनकर एकत्रित करते हैं और मंदिरों के बाहर फूल मालाओं के साथ धतूरे को बेचते हैं, जिससे उन्हें अच्छा खासा मुनाफा हो जाता है.

मंदिर के बाहर फूल बेचने वाली महिला विनीता चोकसे ने बताया कि "वह लगभग 8 साल से फूल बेच रही हैं. सावन के महीने में विशेष रूप से लोग धतूरे का फूल फल मांगते हैं, जिसके कारण उनकी अच्छी खासी आय हो जाती है. वर्तमान समय में बहुत कम धतूरे के पौधे बचे हैं, जिसके कारण थोड़ी बहुत उन्हें समस्या आती है, पहले तो वहां वैसे ही लोगों को भगवान को अर्पित करने के लिए फूल दे देती थीं, पर अब उन्हें बेचकर अपने आय का साधन बना लिया है.