रायसेन जिले के उदयपुरा में नेशनल हाईवे-45 पर मुख्य पुल के समीप बनी सर्विस रोड का एक हिस्सा भारी वाहन के गुजरने से करीब एक फीट गहराई तक धंस गया। घटना रात के समय हुई, जब एक भारी लोडिंग ट्रक इस मार्ग से गुजर रहा था। गनीमत रही कि चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए वाहन को सुरक्षित निकाल लिया, अन्यथा यहां बड़ा हादसा हो सकता था।

बताया जाता है कि उदयपुरा में वर्तमान मुख्य पुल के समानांतर बनी यह सर्विस रोड पहले नेशनल हाईवे-12 का मुख्य पुल हुआ करती थी। नवीन पुल के निर्माण के बाद पुराने पुल को सर्विस रोड के रूप में उपयोग किया जाने लगा। स्थानीय लोगों के अनुसार पुराना पुल पहले से ही क्षतिग्रस्त और जर्जर स्थिति में था। इस पुल का निर्माण कार्य 10 अक्टूबर 1978 को शुरू हुआ था और वर्ष 1980 में इसे यातायात के लिए शुरू किया गया था।

भारी वाहन के गुजरने के बाद सड़क धंसने की जानकारी मिलते ही बंसल कंपनी के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर दोनों ओर मिट्टी डालकर रास्ते को फिलहाल बंद कर दिया। इससे संभावित दुर्घटना को तत्काल टाल दिया गया, लेकिन पुराने पुल और सर्विस रोड की मजबूती को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

गौरतलब है कि सिंदूर नदी से लेकर मंडीदीप तक रायसेन जिले में नेशनल हाईवे-45 पर एक दर्जन से अधिक पुल ऐसे बताए जा रहे हैं, जो लंबे समय से क्षतिग्रस्त हैं और इनमें कई पुल 50 से 70 वर्ष से अधिक पुराने हैं। इन पुलों की जर्जर स्थिति को लेकर मीडिया द्वारा समय-समय पर प्रशासन और प्रदेश के राजस्व मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल को भी अवगत कराया जाता रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जबलपुर से भोपाल की ओर आने वाले मार्ग पर कई पुराने पुलों का नवीन निर्माण किया जा चुका है, लेकिन दूसरी दिशा में अब भी कई पुराने पुलों पर यातायात का दबाव बना हुआ है। उदयपुरा में सर्विस रोड का धंसना इस बात का संकेत है कि पुराने पुलों की तत्काल तकनीकी जांच कराकर आवश्यक मरम्मत अथवा नए पुलों के निर्माण की जरूरत है।

फिलहाल रास्ता बंद किए जाने से तत्काल खतरा टल गया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही इन पुराने पुलों की सुध ली जाएगी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से जल्द से जल्द पुल का निरीक्षण कर स्थायी समाधान की मांग की है।