धौलपुर जिले में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। आपको बता दे पिछले करीब डेढ़ वर्ष में जिलेभर से 1 लाख 64 हजार 165 लोगों के नाम राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की सूची से हटाए गए हैं। रसद विभाग द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के तहत ऐसे लोगों की पहचान की गई जो सरकारी मानकों के अनुसार योजना के पात्र नहीं थे, लेकिन फिर भी खाद्यान्न सुरक्षा योजना का लाभ ले रहे थे। विभाग ने पहले ‘गिव अप अभियान’ के जरिए लोगों से स्वेच्छा से राशन कार्ड सरेंडर करने की अपील की थी, जिसके बाद कई लोगों ने स्वयं अपने नाम हटवाए, जबकि बड़ी संख्या में लाभार्थियों की जांच कर विभाग ने सीधे कार्रवाई की। जांच के चलते आयकरदाता, सरकारी एवं अर्द्धसरकारी कर्मचारी, अधिक आय वाले पेंशनधारी, चार पहिया वाहन धारक, जीएसटी पंजीकृत व्यक्ति तथा निर्धारित सीमा से अधिक कृषि भूमि और संपत्ति रखने वाले लोगों को योजना के लिए अपात्र माना गया। इसके आधार पर जिले के विभिन्न ब्लॉकों में व्यापक छंटनी करते हुए उनके नाम सूची से हटाए गए। हालांकि कार्रवाई के दौरान कई ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें पात्र लोगों के नाम भी सूची से कटे जिसके चलते वे अब दोबारा नाम जुड़वाने के लिए रसद विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। विभाग ने जांच में सही पाए जाने पर 4262 राशन कार्डों को पुनः सक्रिय किया है और 16 हजार 134 यूनिटों को फिर से जोड़ा गया है। इसके अलावा 1 लाख 39 हजार 335 नई यूनिटों को खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक राज्य में खाद्य सुरक्षा योजना के लाभार्थियों की संख्या केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सीलिंग के अनुसार सीमित है, इसलिए नए पात्र परिवारों को जोड़ने के लिए अपात्र लाभार्थियों को हटाना जरुरी है। वर्तमान में भी विभाग की कार्रवाई जारी है और पात्रता मानकों के आधार पर लाभार्थियों का सत्यापन किया जा रहा है। विभाग का मानना है कि इस अभियान का उद्देश्य वास्तव में जरूरतमंद और पात्र परिवारों तक योजना का लाभ पहुंचाना है, ताकि खाद्य सुरक्षा योजना का फायदा केवल उन्हीं लोगों को मिल सके जो इसके सच में हकदार हैं।