मध्य प्रदेश की राजनीति में भाजपा की नई प्रदेश कार्यसमिति सूची जारी होने के बाद सियासी माहौल गरम हो गया है। लंबे इंतजार के बाद घोषित 106 सदस्यों की इस सूची में कई वरिष्ठ नेताओं को जगह मिली है, लेकिन चार मौजूदा कैबिनेट मंत्रियों के नाम शामिल नहीं होने से राजनीतिक हलचल और तेज हो चुकी है। बताया जा रहा है कि ये मंत्री संगठन, संघ और विभिन्न राजनीतिक गुटों से मजबूत पकड़ रखते हैं, इसके बावजूद उन्हें सूची से बाहर रखा गया है। इस फैसले के बाद मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें और गहरी हो गयी हैं और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी की यह सूची संगठनात्मक संतुलन, क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, इसलिए कुछ बड़े नामों को इस बार जगह नहीं मिल पाई है.. हालांकि, पार्टी के अंदरूनी नेताओं के मुताबिक इसे सीधे तौर पर मंत्रिमंडल से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बावजूद चार मंत्रियों का नाम न होना आने वाले समय में संभावित कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की ओर इशारा करता नजर आ रहा है। वहीं दूसरी ओर, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मुख्यमंत्री मोहन यादव की टीम समन्वय के संकेत भी इस सूची में साफ नजर आ रहे हैं। कार्यसमिति में सीएम सहित कई मंत्रियों को जगह मिल गयी है, लेकिन कुछ अहम चेहरों की गैरमौजूदगी ने कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह केवल संगठनात्मक बदलाव है या फिर जल्द होने वाले बड़े राजनीतिक फेरबदल के संकेत की और ईशारा कर रही है....
