राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड डे मील यानी पीएम पोषण योजना के भोजन की गुणवत्ता को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। अब स्कूलों में खाद्यान्न की खरीद, भंडारण और उपयोग तक हर स्तर पर जाँच की जाएगी। मिड डे मील आयुक्तालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि यदि किसी स्कूल में बच्चों को खराब, नमीयुक्त, फफूंद लगा या एक्सपायरी के करीब पहुंचा खाद्यान्न परोसा गया तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पीएम पोषण आयुक्त विश्व मोहन शर्मा ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक विद्यालय में खाद्यान्न का स्टॉक रजिस्टर पूरी पारदर्शिता के साथ अपडेट रखा जाए। इसमें खाद्यान्न मिलने की तारीख, उपयोग की तारीख, उपलब्ध स्टॉक और एक्सपायरी से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज करना अनिवार्य होगा। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों द्वारा इन्हीं रिकॉर्ड के मुताबिक व्यवस्था की जांच की जाएगी। जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारी अब नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करेंगे और खाद्यान्न की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था तथा भोजन वितरण प्रणाली की जांच करेंगे।

निर्देशों में साफ कहा गया है कि अगर किसी खाद्यान्न में नमी, फफूंद, दुर्गंध, रंग में बदलाव या किसी तरह की है तो उसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर उसे अलग रखा जाए और इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दी जाए। बच्चों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके अलावा स्कूलों को खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण के लिए FEFO यानी फर्स्ट एक्सपायरी, फर्स्ट आउट प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पहले खराब होने लके चलते खाद्यान्न का उपयोग पहले किया जा सके और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल सके।