Monday, 19 October 2026
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मंडला की मां काली मढ़िया: संतान सुख की आस में दूर-दूर से पहुंचती हैं महिलाएं, नवरात्र में उमड़ता है आस्था का सैलाब

संक्षेप में

मंडला जिले के भुआ बिछिया वार्ड क्र 10 में स्थित मां काली की मढ़िया निःसंतान महिलाओं के लिए संतान प्राप्ति की मन्नतों का प्रमुख केंद्र है। यहाँ हर बुधवार-रविवार को श्रद्धालु पहुंचते हैं और नवरात्र में जवारा विसर्जन का भव्य चल समारोह निकलता है।

मुख्य बातें

  • मढ़िया मंडला जिले के भुआ बिछिया क्षेत्र के वार्ड क्र 10 में स्थित है।
  • यहाँ हर सप्ताह के बुधवार और रविवार को सैकड़ों महिलाएं संतान प्राप्ति की अर्जी लगाने पहुंचती हैं।
  • मन्नत पूरी होने पर पुजारी मां काली का रूप धरकर नवजात को गोद में लेते हैं और मुंडन संस्कार होता है।
  • नवरात्र के नौवें दिन यहाँ जवारा विसर्जन का बड़ा चल समारोह निकाला जाता है जिसमें विभिन्न जिलों से लोग शामिल होते हैं।
मध्य प्रदेश
मंडला की मां काली मढ़िया: संतान सुख की आस में दूर-दूर से पहुंचती हैं महिलाएं, नवरात्र में उमड़ता है आस्था का सैलाब

मंडला जिले के भुआ बिछिया क्षेत्र में वार्ड क्र 10 स्थित मां काली की सुप्रसिद्ध मढ़िया क्षेत्र के मुख्य आस्था केंद्रों में शुमार हो चुकी है। खासकर शारदीय नवरात्र के दौरान यहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। निःसंतान दंपतियों और विशेषकर महिलाओं के लिए यह स्थान विशेष महत्व रखता है, जहां मन्नतें मांगने के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं।

संतान प्राप्ति की मान्यता और परंपरा

स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, जो महिलाएं सच्चे मन से मां के दरबार में संतान प्राप्ति की अर्जी लगाती हैं, उनकी मनोकामना पूरी होती है। इसी अगाध विश्वास के चलते हर हफ्ते के बुधवार और रविवार को सैकड़ों महिलाएं यहां माथा टेकने पहुंचती हैं। मन्नत पूरी होने के बाद जब परिवार दोबारा मंदिर पहुंचता है, तो परंपरा का एक खास दौर शुरू होता है।

पुजारी मां काली का स्वरूप धारण कर नवजात शिशुओं को मंदिर के मुख्य द्वार से अपनी गोद में उठाकर अंदर लाते हैं। इसके बाद परिसर में ही बच्चों का मुंडन संस्कार कराया जाता है। जिन परिवारों की मनोकामना पूरी होती है, वे बाजे-गाजे के साथ विशेष भेंट लेकर मां के दरबार में हाजिरी लगाते हैं और धन्यवाद स्वरूप जवारे बोते हैं।

नवरात्र और जवारा विसर्जन का उल्लास

शारदीय नवरात्र के दिनों में इस मंदिर परिसर का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। नगाड़ों की गूंज, घंटे-घड़ियालों की आवाज और मां के जयकारों के बीच श्रद्धालु भक्ति भाव में झूमते नजर आते हैं। पुरुष और महिलाएं ‘भाव’ खेलते हुए अपनी अगाध श्रद्धा प्रकट करते हैं।

महिषासुर मर्दिनी के इस दरबार में नौवें दिन जवारा विसर्जन का भव्य चल समारोह निकाला जाता है। इस आयोजन में मंडला के अलावा आसपास के कई जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। चल समारोह के दौरान बाहर से आए कलाकारों द्वारा आकर्षक झांकियां सजाई जाती हैं, जिन्हें देखने के लिए भारी भीड़ जुटती है। जवारा विसर्जन यात्रा के वक्त महिलाएं कतारबद्ध होकर भाव खेलते हुए आगे बढ़ती हैं, जो इस अनुष्ठान का मुख्य आकर्षण होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मां काली की मढ़िया कहाँ स्थित है?

मां काली की यह सुप्रसिद्ध मढ़िया मंडला जिले के भुआ बिछिया क्षेत्र के वार्ड क्र 10 में स्थित है, जो अब एक प्रमुख आस्था केंद्र बन चुकी है।

यह मढ़िया किस मान्यता के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है?

यह मढ़िया मुख्य रूप से निःसंतान महिलाओं के बीच संतान प्राप्ति की मन्नतों के लिए जानी जाती है, जहाँ बुधवार और रविवार को विशेष रूप से भीड़ जुटती है।

मन्नत पूरी होने के बाद मंदिर में कौन सी विशेष रस्म निभाई जाती है?

मनोकामना पूर्ण होने पर पुजारी मां काली का स्वरूप धारण कर नवजात शिशु को मंदिर के द्वार से गोद में उठाकर अंदर लाते हैं और दर्शन के बाद मुंडन संस्कार कराया जाता है।

शारदीय नवरात्र के दौरान यहाँ क्या विशेष आयोजन होता है?

शारदीय नवरात्र के नौवें दिन यहाँ जवारा विसर्जन का एक भव्य चल समारोह निकाला जाता है, जिसमें आसपास के जिलों से भी हजारों श्रद्धालु और कलाकार शामिल होते हैं।