मंडला जिले के भुआ बिछिया क्षेत्र में वार्ड क्र 10 स्थित मां काली की सुप्रसिद्ध मढ़िया क्षेत्र के मुख्य आस्था केंद्रों में शुमार हो चुकी है। खासकर शारदीय नवरात्र के दौरान यहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। निःसंतान दंपतियों और विशेषकर महिलाओं के लिए यह स्थान विशेष महत्व रखता है, जहां मन्नतें मांगने के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं।
संतान प्राप्ति की मान्यता और परंपरा
स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, जो महिलाएं सच्चे मन से मां के दरबार में संतान प्राप्ति की अर्जी लगाती हैं, उनकी मनोकामना पूरी होती है। इसी अगाध विश्वास के चलते हर हफ्ते के बुधवार और रविवार को सैकड़ों महिलाएं यहां माथा टेकने पहुंचती हैं। मन्नत पूरी होने के बाद जब परिवार दोबारा मंदिर पहुंचता है, तो परंपरा का एक खास दौर शुरू होता है।
पुजारी मां काली का स्वरूप धारण कर नवजात शिशुओं को मंदिर के मुख्य द्वार से अपनी गोद में उठाकर अंदर लाते हैं। इसके बाद परिसर में ही बच्चों का मुंडन संस्कार कराया जाता है। जिन परिवारों की मनोकामना पूरी होती है, वे बाजे-गाजे के साथ विशेष भेंट लेकर मां के दरबार में हाजिरी लगाते हैं और धन्यवाद स्वरूप जवारे बोते हैं।
नवरात्र और जवारा विसर्जन का उल्लास
शारदीय नवरात्र के दिनों में इस मंदिर परिसर का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। नगाड़ों की गूंज, घंटे-घड़ियालों की आवाज और मां के जयकारों के बीच श्रद्धालु भक्ति भाव में झूमते नजर आते हैं। पुरुष और महिलाएं ‘भाव’ खेलते हुए अपनी अगाध श्रद्धा प्रकट करते हैं।
महिषासुर मर्दिनी के इस दरबार में नौवें दिन जवारा विसर्जन का भव्य चल समारोह निकाला जाता है। इस आयोजन में मंडला के अलावा आसपास के कई जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। चल समारोह के दौरान बाहर से आए कलाकारों द्वारा आकर्षक झांकियां सजाई जाती हैं, जिन्हें देखने के लिए भारी भीड़ जुटती है। जवारा विसर्जन यात्रा के वक्त महिलाएं कतारबद्ध होकर भाव खेलते हुए आगे बढ़ती हैं, जो इस अनुष्ठान का मुख्य आकर्षण होता है।
