मंदसौर नगर पालिका ने शहर की सड़कों पर बने गड्ढों से राहत दिलाने के लिए नई तकनीक का परीक्षण शुरू कर दिया है। शहर में पहली बार जर्मन टेक्नोलॉजी के जरिए सड़कों के पैचवर्क का काम हाथ में लिया गया है। फिलहाल इसे प्रायोगिक तौर पर परखा जा रहा है, और यदि इसके नतीजे बेहतर रहे तो आने वाले दिनों में पूरे शहरी इलाके में इसी तकनीक से मरम्मत कराई जाएगी।
वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बन चुके गड्ढों से निपटने के लिए यह कदम उठाया गया है। बारिश और भारी आवाजाही के चलते शहर के कई हिस्सों में सड़कें उखड़ गई हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। इस नई विधि के जरिए मरम्मत कार्य की गुणवत्ता और टिकाऊपन का आकलन किया जा रहा है।
तकनीकी दक्षता और पैचवर्क का तरीका
इस जर्मन विधि में विशेष प्रकार के कोल्ड मिक्स और आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है, जो कम समय में गड्ढों को मजबूत सतह से भर देती हैं। नगर पालिका के मुताबिक, पारंपरिक तरीकों की तुलना में इस तकनीक से भरे गए गड्ढे ज्यादा समय तक टिकते हैं और ट्रैफिक के दबाव को आसानी से झेल लेते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि ट्रायल के दौरान यह देखा जा रहा है कि सड़क की सतह कितनी समतल रहती है और मौसम के बदलावों पर यह तकनीक कैसा असर दिखाती है। मरम्मत के बाद सड़क के टिकाऊपन और रिपेयर किए गए हिस्से पर दोबारा गड्ढे उभरने की स्थिति से ही इसकी वास्तविक सफलता तय होगी।
व्यापक उपयोग पर फैसला जल्द
सड़कों की खस्ताहाल स्थिति से जूझ रहे शहरवासियों को इस नई पहल से स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है। यदि यह ट्रायल अपने मानकों पर खरा उतरता है, तो नगर पालिका वार्डवार सर्वे कराकर बड़े पैमाने पर इसी विधि का उपयोग करने की योजना बनाएगी। फिलहाल तकनीकी परिणामों पर अधिकारियों की नजर टिकी हुई है।
