राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून की एंट्री का इंतजार आखिरकार जल्द खत्म होने वाला है, लेकिन इस बार प्रदेश में मानसून की शुरुआत अपेक्षाकृत कमजोर रहने के संकेत बताये जा रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर की मानसूनी शाखाएं आगे बढ़ चुकी हैं और उनके प्रभाव से दक्षिणी राजस्थान के मेवाड़-वागड़ क्षेत्र में मानसूनी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। हालांकि प्रदेश में मानसून का आधिकारिक प्रवेश 28 जून के बाद होने की संभावना जताई जा रही है। आमतौर पर 18 से 22 जून के बीच मानसून राजस्थान में प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी रहने से देरी हो रही है। पिछले कुछ दिनों में उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और हाड़ौती क्षेत्र में हुई प्री-मानसून बारिश ने मौसम को सुहावना बनाया है और लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी है। वहीं किसान खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं और उनकी निगाहें अब मानसून की दस्तक पर टिकी हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून के पहले चरण में भारी वर्षा की संभावना कम है तथा शुरुआती दिनों में रुक-रुक कर बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है की अल नीनो के प्रभाव, लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ, पामीर-हिंदुकुश क्षेत्र में बर्फबारी और वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव के कारण इस बार मानसून की गति प्रभावित हुई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून अधिक सक्रिय होगा, जिसके बाद प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। ऐसे में गर्मी और उमस से परेशान लोगों के साथ-साथ किसानों को भी जल्द राहत मिल सकती है।
