नसीराबाद। नगर पालिका चुनाव में नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। अब 20 वार्डों में चुनावी मुकाबला रोचक होने के साथ-साथ राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला नजर आ रहा है, वहीं आरएलपी के नौ प्रत्याशी और 22 निर्दलीय उम्मीदवार कई वार्डों में चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। इस चुनाव में कुल 31 व्यक्ति ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में थे। नाम वापसी के बाद इनमें से नौ प्रत्याशियों ने मैदान छोड़ दिया, जिसके बाद अब 22 निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी दंगल में डटे हुए हैं। ऐसे में कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के लिए चुनौती बन सकते हैं। भाजपा चुनाव प्रचार में केंद्र और राज्य के साथ नगर पालिका में भी भाजपा का बोर्ड बनाने का मुद्दा जोर-शोर से उठा रही है। पार्टी का कहना है कि तीनों स्तरों पर भाजपा की सरकार होने से विकास कार्यों को गति मिलेगी। इसी को लेकर भाजपा ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ के नारे के साथ मतदाताओं के बीच पहुंच रही है। वहीं दूसरी तरब कांग्रेस ने बस स्टैंड से नगर पालिका तक की जर्जर सड़क और जगह-जगह गहरे गड्ढों को भाजपा के खिलाफ बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में थी। सड़क की खराब हालत चुनावी माहौल में भी चर्चा का विषय बन गया था। लेकिन चुनाव के ऐन मौके पर संबंधित मार्ग के आवश्यक स्थानों पर गड्ढों की पैचिंग और सड़क का समतलीकरण कर दिया गया। इससे कांग्रेस के हाथ से एक बड़ा चुनावी मुद्दा निकलता नजर आया। सड़क पर गड्ढों की पैचिंग होने के बाद राहगीरों और वाहन चालकों को काफी राहत मिली है। चुनावी दृष्टि से देखें तो भाजपा के लिए यह राहत की खबर मानी जा रही है। जिस सड़क की बदहाली को कांग्रेस भाजपा के खिलाफ प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी में थी, फिलहाल उसकी मरम्मत के बाद वही मुद्दा कमजोर पड़ गया है। अब चुनावी मैदान में भाजपा का ‘ट्रिपल इंजन’ बनाम कांग्रेस की स्थानीय समस्याओं और जनमुद्दों की रणनीति के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा। इसके साथ ही आरएलपी और निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी कई वार्डों में जीत-हार का गणित बदल सकती है। नाम वापसी के बाद अब प्रत्याशियों का पूरा फोकस मतदाताओं को साधने और अपने पक्ष में माहौल बनाने पर है।