ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग में तगड़े मुनाफे का लालच देकर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का नीमच पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के 4 शातिर सदस्यों को दबोच लिया है। आरोपियों के पास से 62 एटीएम कार्ड, नकदी और वाहन समेत भारी मात्रा में साजो-सामान बरामद किया गया है।
गृह मंत्रालय के I4C (इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर) के एनसीआरपी पोर्टल से संदिग्ध म्यूल खातों और एटीएम निकासी के इनपुट मिले थे। इन्हीं तकनीकी इनपुट्स के आधार पर पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई प्लान की गई।
बैंक किट और फर्जी खातों का खेल
16 और 17 अक्टूबर की दरमियानी रात मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना पर पुलिस ने नीमच के स्थानीय एटीएम बूथों और बैंकों के आसपास घेराबंदी की। इस दौरान पुलिस ने निखिल कुमावत, दीपक मेघवाल और जयंत कुमावत को हिरासत में लिया। तीनों आरोपी जीरन थाना क्षेत्र के कचोली गांव के रहने वाले हैं।
कड़ाई से पूछताछ में इन्होंने कबूला कि वे खुद के और दूसरे ग्रामीणों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों की पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड की किट निकालकर वे गिरोह के मुख्य सरगना तक पहुंचाते थे। पुलिस ने इनकी निशानदेही पर नीमच की स्टार सिटी कॉलोनी निवासी मुख्य आरोपी अल्केश पंवार को भी धर दबोचा।
'मनी ग्रो' वेबसाइट के जरिए ठगी का जाल
मुख्य आरोपी अल्केश पंवार 'www.moneygrow.live' के नाम से एक फर्जी वेबसाइट संचालित कर रहा था। इसके जरिए वह सोशल मीडिया और फोन कॉल के माध्यम से लोगों को शेयर बाजार में मोटी कमाई का झांसा देता था। ठगी की पूरी रकम इन्हीं फर्जी म्यूल खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से विभिन्न बैंकों के 62 डेबिट और एटीएम कार्ड, 9 बैंक पासबुक, 8 चेकबुक, 8 स्मार्टफोन, एक लैपटॉप, एक मैकबुक, एक एटीएम स्वैप मशीन, एक हुंडई औरा कार और 51,500 रुपये नकद जब्त किए हैं।
दर्ज हुआ मुकदमा, आगे की जांच जारी
इस मामले में नीमच सिटी थाने में अपराध क्रमांक 555/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2) और आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब इन बैंक खातों के कुल ट्रांजैक्शन और गिरोह के अन्य राज्यों में फैले संपर्कों की पड़ताल कर रही है। इस पूरी कार्रवाई में नीमच सिटी थाना प्रभारी विजय सागरिया और साइबर सेल प्रभारी प्रधान आरक्षक प्रदीप शिन्दे के नेतृत्व वाली टीम की मुख्य भूमिका रही।
