नदियों में धार्मिक अनुष्ठानों के नाम पर बड़ी मात्रा में सामग्री प्रवाहित करने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एक अहम रुख अपनाया है। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के सतदेव गांव में नर्मदा नदी में 11,000 लीटर दूध और 210 साड़ियां प्रवाहित करने की शिकायत पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से वैज्ञानिक रिपोर्ट तलब की है।

क्या है पूरा मामला? याचिकाकर्ता सिद्धार्थ सिंह राजपूत ने NGT की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें तर्क दिया गया कि धार्मिक आयोजनों के दौरान इस तरह की भारी मात्रा में सामग्री नदी में डालने से पानी दूषित होता है और जलीय जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। मामले की सुनवाई जस्टिस शिव कुमार सिंह और कार्यकारी सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच कर रही है।

वैज्ञानिक आधार की तलाश सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने पाया कि अभी तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक डेटा मौजूद नहीं है जो यह साबित कर सके कि नदी में दूध डालने से कितना और किस स्तर का प्रदूषण फैलता है। इसी वजह से NGT ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए हैं। बोर्डों को यह जांचना होगा कि:

  • क्या ऐसी धार्मिक सामग्रियां मौजूदा पर्यावरण नियमों के दायरे में आती हैं?
  • क्या ये सामग्रियां नदी के बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) और पानी की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं?
  • क्या इनके लिए अलग से दिशानिर्देशों की आवश्यकता है?

परंपरा बनाम पर्यावरण का संतुलन भारत में नदियों को केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र माना जाता है। राख विसर्जन से लेकर मछलियों को दाना डालने और फूल-प्रसाद चढ़ाने तक की परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं। पर्यावरणविदों का मानना है कि प्रतीकात्मक रूप से की जाने वाली पूजा और हजारों लीटर सामग्री के निपटान के बीच अंतर होना चाहिए।

NGT का यह आदेश एक 'मध्यम मार्ग' की ओर इशारा करता है। ट्रिब्यूनल ने बिना किसी पूर्व धारणा के वैज्ञानिक साक्ष्यों पर जोर दिया है। अतीत में मूर्तियों के विसर्जन (विशेषकर प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों के उपयोग) पर बने दिशानिर्देशों की तरह ही, अब दूध और अन्य जैविक पदार्थों के बड़े पैमाने पर निपटान पर भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विचार किया जा सकता है। भविष्य में आने वाली रिपोर्ट यह तय करेगी कि आस्था और पारिस्थितिकी तंत्र के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।