Friday, 2 October 2026
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ओंकारेश्वर: पितृपक्ष पर नर्मदा तट पर उमड़े श्रद्धालु, विधि-विधान से कर रहे तर्पण और पिंडदान

संक्षेप में

पितृपक्ष के दौरान तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में देश भर से पहुंचे श्रद्धालु नर्मदा तट पर स्नान कर विधि-विधान से तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान कर रहे हैं।

मुख्य बातें

  • पितृपक्ष के 16 दिनों के दौरान ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान चल रहे हैं
  • श्रद्धालु पुरोहितों के मार्गदर्शन में तर्पण और पिंडदान कर रहे हैं
मध्य प्रदेश
ओंकारेश्वर: पितृपक्ष पर नर्मदा तट पर उमड़े श्रद्धालु, विधि-विधान से कर रहे तर्पण और पिंडदान

पितृपक्ष के 16 दिनों के दौरान तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी है। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु मां नर्मदा में स्नान कर अपने पितरों की आत्मशांति और मोक्ष की कामना के साथ विधि-विधान से तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान कर रहे हैं।

सुबह होते ही नगर के प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो जाती है। पुरोहितों के मार्गदर्शन में नर्मदा पूजन के बाद श्रद्धालु अपने पितरों का स्मरण करते हुए जल, तिल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर रहे हैं। कई परिवार अपने दिवंगत परिजनों की स्मृति में विशेष श्राद्ध और अनुष्ठान भी करवा रहे हैं।

घाटों पर जारी है कर्मकांड का सिलसिला

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। इसी आस्था के चलते ओंकारेश्वर के तटों पर इन दिनों लगातार धार्मिक अनुष्ठान चल रहे हैं।

तर्पण के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना है कि ओंकारेश्वर की पावन भूमि पर मां नर्मदा के सान्निध्य में पितरों का स्मरण करने से विशेष आध्यात्मिक शांति मिलती है। घाटों पर स्थानीय पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरी विधि के साथ कर्मकांड संपन्न कराया जा रहा है। सुबह से शाम तक घाटों का पूरा माहौल धार्मिक परंपराओं और अनुष्ठानों से सराबोर नजर आ रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ओंकारेश्वर में पितृपक्ष के दौरान क्या विशेष आयोजन हो रहा है?

ओंकारेश्वर में पितृपक्ष के 16 दिनों के दौरान देश भर से आए श्रद्धालु नर्मदा तट पर स्नान कर अपने पितरों की आत्मशांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान कर रहे हैं।

श्रद्धालु ओंकारेश्वर में किस विधि से कर्मकांड कर रहे हैं?

श्रद्धालु स्थानीय पुरोहितों के मार्गदर्शन में नर्मदा पूजन करने के बाद जल, तिल और पूजन सामग्री अर्पित कर अपने पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण कर्म संपन्न कर रहे हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष का क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक विशेष अवसर माना जाता है।