सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने गतिविधियां तेज कर दी हैं। श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने और यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए प्रशासन ने सड़क चौड़ीकरण और प्रभावित परिवारों के विस्थापन की रूपरेखा पर काम शुरू कर दिया है।
गुरुवार को आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, मांधाता विधायक नारायण पटेल और खंडवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता के साथ नगर की 17 सदस्यीय सामंजस्य समिति और पार्षद शामिल हुए।
41 मकानों पर मंडराया संकट, विस्थापन पर मंथन
प्रशासन द्वारा तैयार किए गए शुरुआती प्रस्ताव के मुताबिक, सिंहस्थ के दौरान बुनियादी ढांचे के विकास और मार्गों के विस्तार से कुल 41 मकान प्रभावित हो सकते हैं। इसमें ओंकारेश्वर मंदिर से बढ़चौक तक के दायरे में आने वाले 36 मकान और ममलेश्वर मंदिर के पास के 5 मकान शामिल हैं।
बैठक में इन परिवारों के पुनर्वास और उचित विस्थापन को लेकर समिति के सदस्यों के साथ विमर्श किया गया, ताकि विकास कार्यों के दौरान स्थानीय नागरिकों को कम से कम असुविधा हो। इसके अलावा, ब्रह्मपुरी क्षेत्र में प्रस्तावित विस्थापन योजनाओं पर भी चर्चा की गई।
पुराने बस स्टेशन से झूला पुल तक चौड़े होंगे मार्ग
तीर्थनगरी में सिंहस्थ के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को प्रबंधित करना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। इसे ध्यान में रखते हुए पुराने बस स्टेशन से पुराने झूला पुल तक के मार्ग को चौड़ा करने का प्रस्ताव प्रमुखता से रखा गया।
इस रूट पर आवागमन को सुचारू बनाने, पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त करने और पुल के आसपास के क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए जाने पर सहमति जताई गई।
सिर्फ 18 माह का समय शेष
सिंहस्थ 2028 के आयोजन में अब करीब 18 महीने का वक्त बचा है। इस अल्प अवधि में सड़कों के चौड़ीकरण, पुल-पुलियों के विस्तार, यातायात प्रबंधन और विस्थापन जैसी बड़ी चुनौतियों को पूरा करना प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा होगी।
बैठक के तुरंत बाद सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, विधायक नारायण पटेल और कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने प्रशासनिक अमले के साथ नगर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पुराने बस स्टेशन, झूला पुल, ब्रह्मपुरी और दोनों प्रमुख मंदिरों के आसपास के क्षेत्रों का पैदल निरीक्षण कर जमीनी हालात का जायजा लिया।
