फतेहगढ़ क्षेत्र में मानसून की लंबी खामोशी ने खरीफ फसलों के भविष्य पर संकट के बादल खड़े कर दिए हैं। मानसून पूर्व हुई अच्छी बारिश के बाद किसानों ने उत्साह में बाजरा, ग्वार और मूंग की बुवाई की थी, लेकिन अब बारिश थमने से खेतों में नमी तेजी से खत्म हो रही है।

फसलों की बढ़वार थमी, सूखने का खतरा क्षेत्र के कई इलाकों में नमी की कमी के कारण पौधों की बढ़वार पूरी तरह रुक गई है। तेज गर्मी और शुष्क हवाओं ने फसलों को और अधिक प्रभावित किया है, जिससे अब फसलें मुरझाने लगी हैं। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है, तो किसानों को फसलों के पूरी तरह सूखने का सामना करना पड़ सकता है।

इस स्थिति को लेकर किसान बांकाराम जाखड़ कहते हैं- "मानसून की बेरुखी से मेहनत पर पानी फिरता दिख रहा है। यदि जल्द वर्षा नहीं हुई तो खरीफ उत्पादन को भारी नुकसान होगा।"

दोबारा बुवाई का आर्थिक बोझ बारिश में और देरी होने पर किसानों के सामने दोबारा बुवाई का विकल्प ही बचेगा। किसान रावत नेहरा के मुताबिक, दोबारा बुवाई करने से बीज, खाद, डीजल और मजदूरी पर अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ेगा, जो छोटे किसानों की कमर तोड़ सकता है। उन्होंने चिंता जताई कि वर्तमान हालात में दोबारा निवेश करना किसी चुनौती से कम नहीं है।

उत्पादन और चारे का संकट सिर्फ फसल ही नहीं, बल्कि पशुधन के लिए चारे का संकट भी गहराने लगा है। किसान  का कहना है कि खेतों में नमी खत्म होने से फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिसका सीधा असर भविष्य में चारे की उपलब्धता पर पड़ेगा। फिलहाल पूरे क्षेत्र के किसान आसमान की ओर उम्मीद लगाए बैठे हैं, क्योंकि खरीफ फसलों को बचाने का एकमात्र सहारा समय पर होने वाली बारिश ही है।