राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 80 पन्नों की नई गाइडलाइन जारी
राजस्थान के किसानों के हितों की सुरक्षा और फसल नुकसान के मुआवजे को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' के तहत एक नया और कड़ा कदम उठाया है। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के निर्देशों पर कृषि विभाग ने 80 पृष्ठों की विस्तृत गाइडलाइन जारी की है, जिसका मुख्य उद्देश्य बीमा कंपनियों की मनमानी, सर्वे में बेवजह की देरी और क्लेम अटकाने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह रोक लगाना है।
नई गाइडलाइंस के मुताबिक कटाई के बाद फसल नुकसान की सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को सर्वेयर नियुक्त करना अनिवार्य होगा। यदि कंपनी इसमें विफल रहती है, तो उस पर प्रति मामला 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। सर्वेयर नियुक्त होने के बाद 10 दिनों के अंदर सर्वे पूरा करना होगा, और इसमें देरी होने पर प्रत्येक लंबित प्रकरण पर रोजाना 1,000 रुपये का अतिरिक्त दंड देय होगा।
इसके अलावा, फसल कटाई प्रयोगों में यदि बीमा कंपनी सह-पर्यवेक्षण नहीं करती है, तो कृषि विभाग की रिपोर्ट को ही अंतिम माना जाएगा और कंपनी उस पर कोई आपत्ति नहीं जता सकेगी। किसानों को आर्थिक राहत देते हुए यह भी तय किया गया है कि यदि बीमा प्रस्ताव निरस्त होने के बाद भी क्लेम प्रक्रिया से पहले प्रीमियम वापस नहीं किया गया, तो कंपनी को संबंधित किसान का पूरा क्लेम चुकाना होगा।
सबसे बड़ी राहत क्लेम भुगतान की समय-सीमा को लेकर दी गई है—यदि क्लेम राशि मिलने में 21 दिन से अधिक का विलंब होता है, तो बीमा कंपनी को भुगतान की तारीख तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से भुगतान करना पड़ेगा। साथ ही, चुनी गई बीमा कंपनियां अपना काम किसी तीसरी संस्था या एजेंट को सबलेट नहीं कर सकेंगी और किसानों की शिकायतों का निस्तारण तहसील से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के पारदर्शी सिस्टम से किया जाएगा।
