राजस्थान में लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर बीजेपी से जुड़े एक स्टडी ग्रुप ने नई रिपोर्ट तैयार की है। इसमें प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 25 से बढ़ाकर 37 करने का सुझाव दिया गया है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की पूर्व रिपोर्ट के आधार पर तैयार इस प्रस्ताव में न केवल सीटों का विस्तार है, बल्कि एससी-एसटी आरक्षित सीटों में भी बड़े बदलाव की सिफारिश की गई है।
12 सीटें हो सकती हैं आरक्षित
बीजेपी स्टडी ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक, परिसीमन के बाद राज्य में कुल 12 सीटें आरक्षित की जा सकती हैं। इनमें एससी के लिए 7 और एसटी के लिए 5 सीटें प्रस्तावित हैं। अभी राज्य में 4 सीटें एससी और 3 सीटें एसटी के लिए रिजर्व हैं। नए प्रस्तावों में नागौर, बारां-झालावाड़ और जयपुर ग्रामीण जैसी प्रमुख सीटों को आरक्षित करने का सुझाव दिया गया है, जिससे कई बड़े नेताओं को अपने लिए नई सियासी जमीन तलाशनी पड़ सकती है।
दिग्गजों के बदले समीकरण
रिपोर्ट में आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल की नागौर सीट को एससी के लिए रिजर्व करने का सुझाव है। वहीं, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के प्रभाव वाली बारां-झालावाड़ सीट को एसटी के लिए आरक्षित करने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, जयपुर ग्रामीण सीट को एससी कोटे में डालने का प्रस्ताव है, जिससे राव राजेंद्र सिंह जैसे नेताओं की स्थिति प्रभावित हो सकती है। इन बदलावों के बाद सचिन पायलट के लिए भी विकल्प खुल सकते हैं, क्योंकि दौसा सीट को सामान्य (General) श्रेणी में लाने का सुझाव दिया गया है।
बीएपी फैक्टर को संतुलित करने की रणनीति
रिपोर्ट में आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बीएपी (BAP) के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए खास रणनीति अपनाई गई है। इसके तहत सिरोही को नई सीट बनाकर उसे एसटी के लिए आरक्षित करने और डूंगरपुर-सलूंबर क्षेत्र को पुनर्गठित करने का सुझाव है। वहीं, कोटा से बूंदी को अलग करने और जयपुर, जोधपुर, सीकर व उदयपुर जैसी सीटों के तीन-तीन टुकड़े करने की सिफारिशें भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद से अलग राय
दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी स्टडी ग्रुप की यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की पूर्व रिपोर्ट से काफी अलग है। सलाहकार परिषद ने 38 सीटों का अनुमान जताया था और बड़े चेहरों वाली सीटों में बदलाव नहीं करने की सलाह दी थी। हालांकि, बीजेपी के इस नए अध्ययन में राजनीतिक नफे-नुकसान को ध्यान में रखते हुए सीटों के भूगोल और आरक्षण में आमूलचूल बदलाव का गणित तैयार किया गया है।
