जयपुर का ऐतिहासिक रामगढ़ बांध एक बार फिर खाली रह गया है। 2024 में शहर में हुई रिकॉर्ड बारिश के बावजूद 155 वर्ग किलोमीटर में फैला यह बांध सूख चुका है। बांध तक पानी न पहुंचने के पीछे मुख्य कारण कैचमेंट एरिया में पिछले 14 वर्षों से बरकरार अवैध अतिक्रमण और जल प्रवाह में आई बाधाएं हैं।

2012 में सरकार ने स्वीकारी थी अतिक्रमण की बात

राजस्थान सरकार ने 2012 में हाईकोर्ट में हलफनामा देकर स्वीकार किया था कि बांध के कैचमेंट क्षेत्र में 235.83 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण है। उस समय प्रशासन ने 225 अवैध भूमि आवंटन और 141 संदिग्ध नामांतरणों की पहचान की थी। हालांकि, इन कब्जों को हटाने के सरकार के दावों के बावजूद स्थिति जस की तस है। वर्ष 2021 से 2026 के बीच इस क्षेत्र में फार्म हाउस, रिसॉर्ट और पक्के निर्माणों की संख्या में और बढ़ोतरी हुई है, जिससे प्राकृतिक जल मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गए हैं।

ईसरदा से पानी लाने की योजना

अब प्रशासन बांध को पुनर्जीवित करने के लिए पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) पर निर्भर है। योजना के तहत ईसरदा बांध से 116 किलोमीटर लंबी फीडर लाइन बिछाई जाएगी, जिसमें 40 किलोमीटर नहर और 76 किलोमीटर पाइपलाइन का निर्माण प्रस्तावित है। वर्तमान में बांध के भराव क्षेत्र में सफाई का काम चल रहा है और पाइपलाइन के अलाइनमेंट के लिए सर्वे किया जा रहा है। हालांकि, इस परियोजना के पूर्ण होने की कोई निश्चित समय-सीमा अभी तक तय नहीं की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बांध की विफलता का कारण केवल कम बारिश नहीं, बल्कि कैचमेंट क्षेत्र में अनियोजित निर्माण और कृत्रिम बाधाएं हैं। 2013 से 2020 के बीच प्रशासन द्वारा की गई सीमित तोड़फोड़ की कार्रवाई भी पूरे इलाके को अतिक्रमण मुक्त कराने में नाकाफी साबित हुई है।