नीमच जिले में इस साल बारिश की खेंच ने किसानों के साथ आमजन की चिंता भी बढ़ा दी है। 2 सितंबर तक जिले में मात्र 22 इंच बारिश दर्ज हुई है जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 41 इंच बारिश हो चुकी थी। यानी पिछले साल की तुलना में इस साल अब तक करीब 50 फीसदी ही बारिश दर्ज हुई है। कम बारिश का सीधा असर जिले के बांधों तालाबों और पेयजल स्त्रोतों पर दिखाई दे रहा है। वर्तमान में जिले के 39 प्रमुख जलस्त्रोतों में कुल जलभराव क्षमता का मात्र 34 फीसदी पानी ही जमा हो पाया है।


39 जलस्त्रोतों में सिर्फ 34% पानी --
जल संसाधन विभाग के अनुसार जिले में करीब 39 बांध और तालाब हैं जिनकी कुल जलभराव क्षमता 83.25 एमसीएम है। इन जलस्त्रोतों से करीब 15 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई होती है। साथ ही कई नगरों और दर्जनों गांवों की पेयजल व्यवस्था भी इन्हीं जलस्त्रोतों पर निर्भर है। इस साल अब तक इन सभी जलस्त्रोतों में सिर्फ 27.91 एमसीएम पानी जमा हुआ है जो कुल क्षमता का लगभग 34 फीसदी है।


पिछले साल 90%, इस बार 34% ही संग्रहण --
पिछले साल 1 सितंबर की स्थिति में जिले के 39 जलस्त्रोतों में करीब 75.27 एमसीएम पानी जमा था जो कुल क्षमता का लगभग 90 फीसदी था। इसके मुकाबले इस साल अब तक सिर्फ 27.91 एमसीएम पानी ही संग्रहित हो पाया है। यानी पिछले साल की तुलना में जलसंग्रहण में करीब 41 फीसदी की कमी है। लगातार बारिश की कमी बनी रही तो आने वाले महीनों में पेयजल व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।


17 जलस्त्रोत पूरी तरह सूखे --
जल संसाधन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले के 39 जलस्त्रोतों में से 17 में अभी तक कोई जल आवक नहीं हुई है। सात जलस्त्रोतों में 0 से 25 फीसदी सात में 25 से 50 फीसदी और पांच जलस्त्रोतों में 50 से 69 फीसदी तक पानी है। वहीं सिर्फ तीन जलस्त्रोत ऐसे हैं, जो 100 फीसदी तक भर पाए हैं। यह स्थिति जिले के जल संकट की गंभीरता को दर्शाती है।


जीरन तालाब में सिर्फ 10 फीसदी पानी --
जीरन क्षेत्र की सिंचाई और पेयजल व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण जीरन तालाब में भी इस बार पर्याप्त पानी नहीं आया है। वर्तमान में तालाब में करीब 10 फीसदी ही पानी जमा हो पाया है। इससे आसपास के किसानों के सामने आगामी रबी सीजन में सिंचाई को लेकर चिंता बढ़ने लगी है।


कुकड़ेश्वर तालाब अब भी सूखा--
कुकड़ेश्वर नगर की पेयजल व्यवस्था जिस तालाब पर निर्भर है वह अब तक सूखा पड़ा है। बारिश की कमी के चलते तालाब में पर्याप्त जलभराव नहीं हो पाया है। यदि आगामी दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो नगर की पेयजल व्यवस्था के सामने संकट खड़ा हो सकता है।


बड़े जलस्त्रोतों पर भी असर --
हर्कियाखाल और शिवाजी सागर बांध से नीमच शहर को पेयजल उपलब्ध कराने के साथ उद्योगों को भी पानी दिया जाता है। वहीं जीरन तालाब से आसपास के किसानों को सिंचाई और नगर को पेयजल मिलता है। कुकड़ेश्वर तालाब नगर की पेयजल व्यवस्था का प्रमुख आधार है। चंबलेश्वर और मोरवन बांध से सिंचाई के अलावा कई नगर परिषदों और तीन दर्जन से अधिक गांवों को पेयजल उपलब्ध कराया जाता है।


खरीफ फसल को अभी राहत रबी पर संकट --
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीपी पचौरी के अनुसार अभी तक हुई बारिश वर्तमान खरीफ फसल के लिए काफी हद तक उपयोगी है। आने वाले दिनों में एक-दो अच्छी बारिश हो जाती है तो फसलों को ग्रोथ मिल सकती है और उत्पादन भी बेहतर रहने की उम्मीद है। हालांकि जलस्त्रोतों में पर्याप्त पानी नहीं आने के कारण चिंता बनी हुई है। यदि बारिश की कमी आगे भी जारी रही तो रबी सीजन की फसलों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। सिंचाई के बांध खाली रहने से किसानों को पर्याप्त पानी मिलना मुश्किल होगा।


4 सितंबर से बारिश की उम्मीद - 
मौसम विभाग भोपाल के अनुसार नीमच जिले में इस साल औसत से कम बारिश दर्ज हुई है। वर्तमान में झारखंड और आसपास बना कम दबाव का क्षेत्र अगले 24 घंटे में दक्षिणी उत्तर प्रदेश और उत्तर-मध्य प्रदेश की ओर बढ़ने की संभावना है। इसके साथ सक्रिय मानसून ट्रफ और ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से नीमच जिले में बारिश का दौर बनने के आसार हैं। मौसम तंत्र के मध्यप्रदेश की ओर बढ़ने से जिले में बादल छाने के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर बारिश की गतिविधि बढ़ने की भी संभावना है।


औसत बारिश तक पहुंचना मुश्किल - 
मौसम विभाग के अनुसार नीमच में 4 सितंबर से अगले तीन-चार दिनों तक बारिश की संभावना है। ऐसे में किसानों और आमजन को राहत की उम्मीद है लेकिन अब तक बारिश में हुई कमी को देखते हुए जिले का औसत बारिश के आंकड़े तक पहुंचना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है। आगामी कुछ दिनों में होने वाली बारिश जिले के जलस्त्रोतों और रबी सीजन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।