सागर जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर बंडा के ग्राम मंजला में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक न पहुंचने का आरोप लगाया है। इस मामले में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पंचायत के जनप्रतिनिधियों और कर्मियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
पक्के मकान के इंतजार में जरूरतमंद परिवार
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में कई ऐसे गरीब परिवार हैं जिनके पास न तो खुद की जमीन है और न ही सिर छुपाने के लिए पक्की छत। सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना ऐसे परिवारों के लिए मुख्य आस है, लेकिन पात्रता रखने के बावजूद कई लोग इस लाभ से वंचित हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पंचायत स्तर पर आवेदनों के चयन और सर्वे की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही है। बंडा के विधायक वीरेंद्र सिंह लम्बरदार ने भी इस मामले में संज्ञान लेते हुए स्थानीय स्तर पर योजनाओं की वास्तविक स्थिति की समीक्षा पर जोर दिया है।
सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक की कार्यप्रणाली पर सवाल
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के सरपंच अजय कुमार मिश्रा, सचिव अरविंद साहू और रोजगार सहायक पर योजनाओं के क्रियान्वयन में अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पात्र हितग्राहियों के चयन में मनमानी बरती जा रही है, जिससे जरूरतमंदों के आवेदन लंबित पड़े हैं।
पंचायत स्तर पर निगरानी कमजोर होने के कारण वास्तविक हकदार सरकारी मदद से दूर हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अभी संबंधित पंचायत अधिकारियों या प्रतिनिधियों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
प्रशासन से निष्पक्ष समीक्षा और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को शिकायती आवेदन सौंपकर मांग की है कि प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े सभी अभिलेखों और हितग्राहियों की सूची की नए सिरे से जांच कराई जाए।
- पंचायत स्तर पर हुए सर्वे की निष्पक्ष समीक्षा हो।
- वंचित पात्र परिवारों को तत्काल योजना का लाभ दिलाया जाए।
- यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही मिलती है, तो संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
इस शिकायत के बाद अब बंडा प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पात्र परिवारों को अब तक योजना का लाभ क्यों नहीं मिल पाया है।
