सीकर नगर निकाय चुनाव के बीच भाजपा को बड़ा सियासी झटका लगा है। वार्ड नंबर 65 से कांग्रेस प्रत्याशी माया देवी निर्विरोध निर्वाचित हो गई हैं। भाजपा प्रत्याशी और एक निर्दलीय के नाम वापस लेने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने माया देवी को विजेता घोषित किया। इस वार्ड में कांग्रेस की यह पहली जीत है।

कैसे हुआ निर्विरोध निर्वाचन?

वार्ड नंबर 65 से कांग्रेस ने माया देवी को मैदान में उतारा था। वहीं भाजपा ने पिंकी पंवार को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया था, जबकि चूका देवी और सरिता देवी ने निर्दलीय के तौर पर पर्चा भरा था। कागजी प्रक्रिया के दौरान चूका देवी का नामांकन पत्र पार्टी सिंबल की तकनीकी वजह से खारिज हो गया था।

इसके बाद मैदान में भाजपा की पिंकी पंवार और निर्दलीय सरिता देवी बची थीं। लेकिन नाम वापसी के आखिरी दिन से ठीक पहले सरिता देवी ने अपना पर्चा वापस ले लिया। इसके बाद बुधवार को भाजपा प्रत्याशी पिंकी पंवार ने भी अपने परिजनों के साथ पहुंचकर नामांकन वापस ले लिया, जिससे माया देवी के निर्विरोध जीतने का रास्ता साफ हो गया।

सियासी समीकरण और भीतरघात की चर्चा

वार्ड 65 के चुनावी समीकरणों को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। स्थानीय जानकारों के मुताबिक, इस वार्ड में 60 से 70 फीसदी मतदाता मुस्लिम हैं। माना जा रहा है कि इन्हीं सियासी समीकरणों को भांपते हुए भाजपा खेमे ने मंगलवार रात से ही मंथन शुरू कर दिया था।

भाजपा की शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि पार्टी के भीतर टिकट वितरण को लेकर उपजे असंतोष और कुछ बागियों के इशारे पर यह घटनाक्रम हुआ। हालांकि भाजपा प्रत्याशी ने नामांकन क्यों वापस लिया, इस संबंध में उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन बात नहीं हो पाई।

भाजपा खेमे में मायूसी, पूर्व विधायक हुए भावुक

इस घटनाक्रम के बाद जहां कांग्रेस खेमे में उत्साह का माहौल है, वहीं भाजपा में मायूसी छा गई है। पूर्व विधायक रतन जलधारी इस पूरे घटनाक्रम पर काफी भावुक नजर आए। उन्होंने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अपनों ने ही पार्टी को यह दर्द दिया है।

उन्होंने आगे कहा कि सीकर नगर परिषद के इतिहास में यह पहला मौका था जब सभी 65 वार्डों में भाजपा ने अपने उम्मीदवार उतारे थे। इसी मजबूत तैयारी से घबराकर अंदरखाने यह सियासी साजिश रची गई। वहीं भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रमेश जलधारी ने कहा कि पार्टी ने वरिष्ठ पदाधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ही पिंकी पंवार को मैदान में उतारा था, लेकिन उन्होंने किन परिस्थितियों में पर्चा वापस लिया, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।