Friday, 23 October 2026
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संयुक्त राष्ट्र में भारत-पाकिस्तान तीखी बहस: भारतीय राजनयिक भाविका मंगलानंदन ने अल्पसंख्यकों के हनन पर PAK को घेरा

संक्षेप में

संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकारों पर हुई बहस के दौरान भारत ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया। भारतीय राजनयिक भाविका मंगलानंदन ने PoJK के रावलाकोट में हुई हिंसा, अल्पसंख्यकों के अधिकारों के हनन और कारगिल जंग के दौरान शवों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार का मुद्दा उठाते हुए पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाई।

मुख्य बातें

  • संयुक्त राष्ट्र में भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक आजादी और मानवाधिकारों को लेकर तीखी बहस हुई।
  • भारतीय राजनयिक भाविका मंगलानंदन ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की घटती संख्या और अधिकारों के हनन का मुद्दा उठाया।
  • भारत ने PoJK के रावलाकोट में जून में हुई हिंसा का जिक्र किया जिसमें 8 प्रदर्शनकारियों और 4 पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी।
  • भारत ने 1999 की कारगिल जंग का हवाला दिया जब भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों के शवों का इस्लामी रीति-रिवाजों से अंतिम संस्कार किया था।
देश विदेश
संयुक्त राष्ट्र में भारत-पाकिस्तान तीखी बहस: भारतीय राजनयिक भाविका मंगलानंदन ने अल्पसंख्यकों के हनन पर PAK को घेरा

संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान आमने-सामने आ गए हैं। गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र में हुई तीखी बहस के दौरान भारत ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को उसके अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और मानवाधिकार रिकॉर्ड पर कड़े शब्दों में घेरा। भारतीय राजनयिक भाविका मंगलानंदन ने स्पष्ट किया कि जो देश अपने यहां धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में नाकाम रहा है, उसे भारत को नसीहत देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

यह तीखी बहस संयुक्त राष्ट्र की एक उस रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान शुरू हुई, जिसमें कोरोना महामारी के दौर में शवों के अंतिम संस्कार और दफनाने में पेश आई प्रशासनिक दिक्कतों के लिए विकासशील देशों को जिम्मेदार ठहराया गया था। इस मंच का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में फर्जी मुठभेड़ों और शवों को सम्मानजनक तरीके से दफनाने का हक न मिलने का निराधार आरोप लगाया था। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के आंतरिक हालात और कब्जे वाले क्षेत्रों की सच्चाई दुनिया के सामने रखी।

PoJK के रावलाकोट में हिंसा और मानवाधिकारों का मुद्दा

बहस के दौरान भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के रावलाकोट में हाल ही में भड़की हिंसा का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा कि वह दूसरों पर अंगुली उठाने से पहले अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में नागरिकों के साथ हो रहे बर्ताव पर गौर करे।

रावलाकोट में इस साल जून के महीने में राजनीतिक अधिकारों और विधानसभा की 12 सीटों को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। ये आरक्षित सीटें भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर से आए शरणार्थियों के लिए तय हैं, जिन्हें खत्म करने की मांग को लेकर स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों और नागरिकों के बीच खूनी झड़पें हुईं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल के आंकड़ों और पुलिस की पुष्टि के मुताबिक, 7 जून को हुई इन हिंसक झड़पों में कम से कम 8 प्रदर्शनकारियों और 4 पुलिसकर्मियों की जान चली गई थी, जिसके बाद से पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।

कारगिल जंग की याद दिलाकर अंतिम संस्कारों की गरिमा पर बात

बहस को आगे बढ़ाते हुए भारतीय पक्ष ने 1999 की कारगिल जंग का एक ऐतिहासिक उदाहरण भी रखा। भारतीय राजनयिक ने याद दिलाया कि उस युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने अपने ही मारे गए सैनिकों के शव लेने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बावजूद भारतीय सेना ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कई पाकिस्तानी सैनिकों के शवों को पूरे सैन्य सम्मान और इस्लामी रीति-रिवाजों के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया था।

भारत ने इस घटना का जिक्र करते हुए जोर दिया कि मृतकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना हर हाल में सुनिश्चित होना चाहिए। किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके शव और अंतिम संस्कार से जुड़े गरिमापूर्ण अधिकारों को राजनीतिक मंचों पर की जाने वाली बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।

आतंकवाद के पीड़ितों के अधिकारों का उठाया गया सवाल

मानवाधिकारों की इस वैश्विक चर्चा में भारत ने आतंकवाद के पीड़ितों और उनके परिवारों के अधिकारों का गंभीर मुद्दा भी उठाया। भारतीय प्रतिनिधि ने कड़े शब्दों में सवाल किया कि वैश्विक मंचों पर अक्सर आतंकवादियों के मानवाधिकारों की पैरवी बहुत जोर-शोर से की जाती है, लेकिन आतंकी हमलों में अपनी जान गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों और उनके परिवारों के अधिकारों पर उतनी गंभीरता क्यों नहीं दिखाई जाती।

भारत का पक्ष था कि मानवाधिकारों की निष्पक्ष समीक्षा तभी संभव है जब आतंकवाद की वजह से प्रभावित हुए पीड़ितों के साथ हुए घोर अन्याय को भी उसी संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ देखा जाए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

संयुक्त राष्ट्र में भारत और पाकिस्तान के बीच किस मुद्दे पर बहस हुई?

संयुक्त राष्ट्र में भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक आजादी, मानवाधिकारों के हनन और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर तीखी बहस हुई।

भारतीय राजनयिक भाविका मंगलानंदन ने पाकिस्तान को क्या जवाब दिया?

भारतीय राजनयिक भाविका मंगलानंदन ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की संख्या लगातार घट रही है और जो देश अपने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा नहीं कर सकता, उसे भारत को नसीहत देने का कोई हक नहीं है।

भारत ने PoJK के किस इलाके में हुई हिंसा का मुद्दा उठाया?

भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के रावलाकोट में हुई हिंसा का जिक्र किया, जहां जून में शरणार्थियों के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों को लेकर प्रदर्शन हुए थे और झड़पों में कई लोग मारे गए थे।

कारगिल युद्ध के संदर्भ में भारत ने क्या याद दिलाया?

भारत ने याद दिलाया कि 1999 की कारगिल जंग में जब पाकिस्तान ने अपने मारे गए सैनिकों के शव लेने से इनकार कर दिया था, तब भारतीय सेना ने उन्हें पूरे सैन्य सम्मान और इस्लामी रीति-रिवाजों के साथ दफनाया था।