Wednesday, 28 October 2026
अभी का दौर

अब सौर ऊर्जा से होगी पानी की सप्लाई

संक्षेप में

राजस्थान सरकार ने पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को अधिक किफायती और ऊर्जा दक्ष बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जलदाय विभाग के बड़े पंपिंग स्टेशनों के लिए पहले चरण में कोटा, बूंदी, दौसा, बारां, भरतपुर, डूंगरपुर, सवाई माधोपुर और टोंक सहित आठ जिलों में 201 मेगावाट क्षमता के मेगा सोलर सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। करीब 703.5 करोड़ रुपये की इस परियोजना से विभाग के बिजली बिल में हर महीने लगभग 184 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है

मुख्य बातें

  • राजस्थान के 8 जिलों में जलदाय विभाग के पंपिंग स्टेशनों पर 201 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाए जाएंगे।
  • इस परियोजना से विभाग के बिजली बिल में हर महीने करीब 184 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।
  • परियोजना PPP मॉडल पर लागू होगी, जिसमें निजी कंपनी प्लांट लगाएगी और सरकार केवल उपयोग की गई बिजली का भुगतान करेगी।
आपणो राजस्थान
अब सौर ऊर्जा से होगी पानी की सप्लाई

राजस्थान में सौर ऊर्जा से होगी पेयजल आपूर्ति, 8 जिलों के पंपिंग स्टेशनों पर लगेंगे 201 मेगावाट के सोलर प्लांट

राजस्थान सरकार ने पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को अधिक किफायती और ऊर्जा दक्ष बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जलदाय विभाग के बड़े पंपिंग स्टेशनों के लिए पहले चरण में कोटा, बूंदी, दौसा, बारां, भरतपुर, डूंगरपुर, सवाई माधोपुर और टोंक सहित आठ जिलों में 201 मेगावाट क्षमता के मेगा सोलर सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। करीब 703.5 करोड़ रुपये की इस परियोजना से विभाग के बिजली बिल में हर महीने लगभग 184 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। अधिकारियों के अनुसार, जलदाय विभाग वर्तमान में सालाना करीब 350 करोड़ यूनिट बिजली की खपत करता है, जिसे कम करने के लिए यह प्रदेश का किसी एक सरकारी विभाग का अब तक का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा आधारित प्रोजेक्ट होगा। यह परियोजना पीपीपी  मॉडल पर लागू की जाएगी, जिसमें निजी कंपनी अपने खर्च पर सोलर प्लांट लगाएगी, उसका संचालन और 25 वर्षों तक रखरखाव करेगी, जबकि विभाग केवल उपयोग की गई बिजली का भुगतान करेगा। वर्चुअल नेट मीटरिंग मॉडल के तहत एक स्थान पर उत्पादित सौर ऊर्जा का लाभ विभाग के कई बिजली कनेक्शनों को मिलेगा। प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए किसी एक कंपनी को अधिकतम 50 मेगावाट का ही कार्य आवंटित किया जाएगा और अनुबंध के 9 महीने के भीतर परियोजना पूरी करनी होगी। सरकार का कहना है कि इस मॉडल के सफल होने के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा, जिससे बिजली खर्च में भारी कमी आने के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा।  

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पहले चरण में राजस्थान के कितने जिलों में सोलर प्लांट लगाए जाएंगे?

8 जिलों में।

इस परियोजना से हर महीने कितनी बिजली लागत बचने का अनुमान है?

A. करीब 184 करोड़ रुपये।