जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। शुक्रवार (17 जुलाई 2026) को उनके चिकित्सक डॉ. सतीश लांबा ने बताया कि 20 दिनों के उपवास के कारण वांगचुक का वजन 350 ग्राम घट गया है और वे हल्के डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) की चपेट में हैं।
स्वास्थ्य पर डॉक्टरों की चेतावनी डॉक्टरों के मुताबिक, वांगचुक का रक्तचाप 108/68 mmHg, ब्लड शुगर 80 mg/dL और पल्स 72 bpm दर्ज की गई है। हालांकि वे अभी मानसिक रूप से सचेत हैं, लेकिन डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि उनका उपवास एक नाजुक मोड़ पर है। इसी बीच, उनके साथ अनशन कर रहे AISA के तीन कार्यकर्ताओं की स्थिति भी बिगड़ी है, जिनमें से एक को गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया के कारण अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी गई है।
विपक्ष का समर्थन और संसद में मुद्दा सोनम वांगचुक से मिलने पहुंचे विपक्षी नेताओं ने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। एनसीपी (शरदचंद्र पवार) सांसद सुप्रिया सुप्रिया सुले ने कहा, "हम सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने का आग्रह करने आए हैं। संसद का सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है, हम NEET छात्रों की चिंताओं सहित इन सभी मुद्दों को सदन में उठाएंगे।"
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध एक संवैधानिक अधिकार है और सरकार का कर्तव्य है कि वह नागरिकों की बात सुने। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने हाई कोर्ट से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है।
बढ़ता समर्थन और प्रतिक्रियाएं वांगचुक के समर्थन में देशभर से आवाजें उठ रही हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी, लेखक अरुंधति राय और फिल्म निर्माता विशाल भारद्वाज सहित 60 से अधिक प्रबुद्ध नागरिकों ने संयुक्त अपील जारी कर उन्हें "हमारी सामूहिक चेतना" बताया है। वहीं, असम के 160 से अधिक नागरिकों ने भी उपवास खत्म करने की अपील की है।
दिल्ली पुलिस की निगरानी पर PIL जंतर-मंतर पर विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों की निगरानी के लिए पुलिस द्वारा लगाए गए टावर और वीडियोग्राफी के खिलाफ पूर्व जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आइशे घोष ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। कोर्ट इस मामले में 20 जुलाई को सुनवाई करेगा। याचिका में इसे प्रदर्शनकारियों की निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है।
