केंद्र सरकार ने डिजिटल स्पेस को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से जारी नए निर्देशों के तहत, अब किसी भी आपत्तिजनक, गैर-कानूनी या संवेदनशील सामग्री की शिकायत मिलने के महज 3 घंटे के भीतर उसे प्लेटफॉर्म से हटाना अनिवार्य कर दिया गया है।
पहले सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसी सामग्री हटाने के लिए 24 से 36 घंटे का समय मिलता था। सरकार का मानना है कि डिजिटल दौर में डीपफेक और भ्रामक वीडियो कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाते हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक सुरक्षा को बड़ा नुकसान होता है। इस त्वरित फैलाव को रोकने के लिए ही समयसीमा को घटाकर तीन घंटे किया गया है।
किन Content पर होगी तत्काल कार्रवाई?
नए नियमों के दायरे में विशेष रूप से डीपफेक और एआई-जनरेटेड content को रखा गया है। इसके अलावा किसी भी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले फर्जी वीडियो और तस्वीरें, बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक Content (CSAM), बिना सहमति के साझा की गई व्यक्तिगत व अश्लील सामग्री और देश की संप्रभुता को प्रभावित करने वाली भ्रामक खबरें शामिल हैं। इन श्रेणियों से जुड़ी शिकायत मिलने पर प्लेटफॉर्म्स को बिना देर किए एक्शन लेना होगा।
आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत जाएगी कानूनी सुरक्षा
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तय तीन घंटे की समयसीमा का पालन न करने वाले प्लेटफॉर्म्स को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियां सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाले 'सेफ हार्बर' का कानूनी संरक्षण खो देंगी। इसके बाद संबंधित कंपनियों को महज मध्यस्थ नहीं माना जाएगा, बल्कि उन्हें सीधे तौर पर आपराधिक और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
