सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया पर बढ़ते दखल और रील्स बनाने के चलन पर लगाम कसने की तैयारी शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार जल्द ही सरकारी सेवकों के लिए एक नई सोशल मीडिया आचार संहिता ला सकती है। हाल ही में प्रधानमंत्री के साथ हुई सचिवों की उच्चस्तरीय बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा की गई थी।

इस प्रस्तावित गाइडलाइन के तहत ड्यूटी के दौरान रील्स बनाने, सरकारी संसाधनों या अपने पद का इस्तेमाल कर व्यक्तिगत प्रचार करने को 'सरकारी सेवक के प्रतिकूल आचरण' की श्रेणी में रखा जा सकता है। ऐसा करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सीधे विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

मौजूदा नियमों का दायरा और नई जरूरत

फिलहाल सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए कोई अलग और स्पष्ट गाइडलाइन मौजूद नहीं है। अभी तक अधिकारी अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमावली के तहत बंधे हैं, जिसके मुताबिक उन्हें अपने पद की गरिमा बनाए रखनी होती है।

लेकिन ये नियम कई दशक पुराने हैं और उस दौर के हैं जब सोशल मीडिया का अस्तित्व नहीं था। मौजूदा समय में बदलते हालातों को देखते हुए इन नियमों की समीक्षा और नए सिरे से स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

विवादों में रहे अधिकारियों के वीडियो और रील्स

हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें सरकारी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने ऑन-ड्यूटी अपने पद, शक्ति और कार्यशैली को सोशल मीडिया पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से कई ऐसे वाकये सामने आए हैं जहां पुलिसकर्मियों ने ड्यूटी के दौरान नाचते-गाते हुए रील्स बनाईं।

इन पोस्ट्स को लेकर कई बार प्रशासनिक स्तर पर असहज स्थिति बनी और विवाद भी खड़े हुए। अधिकारियों के इस तरह के आचरण को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे कि क्या यह पद की गरिमा के अनुकूल है।

क्या हैं मौजूदा मीडिया और आचरण के नियम?

वर्तमान नियमों के तहत बिना सरकार की पूर्व अनुमति के कोई भी अधिकारी किसी मीडिया आउटलेट का स्वामित्व, संपादन या संचालन नहीं कर सकता। यदि अनुमति मिल भी जाती है, तो मीडिया में व्यक्त किए गए विचार उस अधिकारी के व्यक्तिगत माने जाएंगे, न कि सरकार के।

इसके अलावा, अधिकारी किसी भी सार्वजनिक मंच या मीडिया पर सरकार की नीतियों की आलोचना नहीं कर सकते। ऐसा कोई भी बयान देना प्रतिबंधित है जिससे केंद्र-राज्य संबंधों या विदेशी देशों के साथ भारत के कूटनीतिक संबंधों पर असर पड़े। आधिकारिक दस्तावेजों या गोपनीय जानकारी को बिना विशेष अनुमति के साझा करना भी नियमों के खिलाफ है, और केवल अधिकृत मंत्री या सचिव ही मीडिया को ब्रीफिंग दे सकते हैं।