नीमच जिले की सिंगोली तहसील के ग्राम धनगांव निवासी एक किसान ने बलराम योजना के तहत स्वीकृत तालाब निर्माण कार्य में कथित वित्तीय अनियमितता और गबन का आरोप लगाते हुए जनसुनवाई में कलेक्टर को शिकायत सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। किसान का आरोप है कि उसके नाम से 1,19,108 का भुगतान दर्शाया गया, जबकि उसे मात्र 15,000 ही प्राप्त हुए।शिकायत के अनुसार किसान के खेत पर “खेत पर बलराम तालाब निर्माण” कार्य स्वीकृत किया गया था। किसान का कहना है कि ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव ने उसे बताया था कि इस योजना के तहत 15,000 की राशि ही मिलेगी। इसी जानकारी के आधार पर उसने आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए। बाद में जब उसने योजना से संबंधित जानकारी प्राप्त की तो पता चला कि उसके नाम से कुल 1,19,108 का भुगतान दर्ज किया गया है।
किसान ने आरोप लगाया कि वास्तविक भुगतान और दर्ज भुगतान के बीच करीब 1,04,108 का अंतर है, जिसकी राशि का गबन किया गया है। उसने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।आवेदन में किसान ने यह भी उल्लेख किया है कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा 8 जनवरी 2020 को जारी आदेश के अनुसार मनरेगा के कार्यों को अन्य योजनाओं के साथ जोड़ना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद उसके दस्तावेजों में कार्य को “बलराम योजना मनरेगा” के रूप में दर्ज किया गया है, जो शासन के निर्देशों के विपरीत है। किसान ने इसे नियमों का उल्लंघन बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।शिकायत में जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत के संबंधित अधिकारियों, तत्कालीन रोजगार सहायक तथा अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की प्रासंगिक धाराओं एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। साथ ही एसडीएम स्तर से मामले की विस्तृत जांच कराने और कथित गबन की राशि की वसूली कर पीड़ित किसान को दिलाने की मांग भी की गई है।किसान ने प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि 1,04,108 की राशि किस खाते में पहुंची, भुगतान किसके आदेश पर किया गया और इस पूरी प्रक्रिया में किन अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका रही। शिकायत सामने आने के बाद अब मामले में प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर क्षेत्रवासियों की नजरें टिकी हुई हैं।