उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच करीब 200 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर को शिफ्ट करने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। विकास कार्यों के लिए मंदिर की प्रतिमा को स्थानांतरित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक प्रतिमा को हटाया नहीं जा सका है। इसी बीच जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर शैलेश आनंद गिरि मंदिर पहुंचे और उन्होंने विकास के साथ आस्था और धार्मिक विरासत के संरक्षण की बात कही। महामंडलेश्वर ने दो टूक कहा कि “जहां हनुमान हैं, वहां हनुमान वैसे ही रहें।” इस दौरान महामंडलेश्वर सहित हिंदू समाज के लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया।
मंदिर बना चमत्कार का केंद्र
उज्जैन का खड़ा हनुमान मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर शहर में चल रहे विकास और सड़क निर्माण कार्यों के बीच मंदिर को शिफ्ट करने की कवायद की जा रही है। प्रशासन और नगर निगम की ओर से प्रतिमा को स्थानांतरित करने के प्रयास किए गए, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। इसी मामले को लेकर जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर शैलेश आनंद गिरि खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे और उन्होंने पूरे मामले पर अपनी बात रखी। महामंडलेश्वर ने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन विकास के साथ आस्था, परंपरा और धार्मिक विरासत का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि उज्जैन की पहचान सिर्फ बड़ी इमारतों से नहीं, बल्कि यहां के धार्मिक स्थलों, परंपराओं और जीवंत आध्यात्मिक संस्कृति से है। उनके मुताबिक उज्जैन को केवल पर्यटन के केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि तीर्थाटन के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां हनुमान की स्थापना है, वहां श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है और ऐसे स्थानों की पहचान को बनाए रखना जरूरी है। महामंडलेश्वर ने सरकार और प्रशासन से जनभावनाओं का सम्मान करने की अपील करते हुए कहा—“जहां हनुमान हैं, वहां हनुमान वैसे ही रहें।” इस दौरान महामंडलेश्वर सहित हिंदू समाज के लोगों ने मंदिर परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ किया। भाजपा पार्षद शिवेंद्र तिवारी और विश्व हिंदू परिषद के धर्म प्रचार प्रमुख शैलू यादव सहित हिंदू संगठन के पदाधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। विश्व हिंदू परिषद के धर्म प्रचार प्रमुख शैलू यादव ने कहा कि हिंदू संगठन शुरुआत से ही प्रतिमा के विस्थापन के मामले में शासन-प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं, लेकिन नगर निगम के कुछ लोगों द्वारा संगठनों को विरोधी बताया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस स्थान पर प्रतिमा को विस्थापित किया जाना प्रस्तावित है, वहां मंदिर निर्माण की मजबूती और भविष्य के विस्तार को लेकर भी सवाल हैं। यादव के मुताबिक निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सरिया 12 एमएम की है, जबकि संगठन की ओर से इसे 16 या 18 एमएम करने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि मंदिर के पुजारी भी अपनी ओर से सरिया उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं, बावजूद इसके नगर निगम के अधिकारियों द्वारा उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। अब सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच खड़े हनुमान मंदिर का मुद्दा विकास और आस्था के बीच संतुलन का सवाल बन गया है और निगाहें शासन-प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
