प्रदेश के साथ साथ रायसेन जिले में इस वार धान का रकवा बढ़कर 40 हजार हेक्टेयर में होने बाला है । बही बारिश न होने से किसानों की जमीन में दरारे पड़ गई है बही धान की पौध भी सूखने लगी है । किसानों ने बताया कि यदि मूंग समर्थन मूल्य पर सही कीमत में बिक जाती तो धान की फसल के लिए कुछ राहत मिल जाती । आज खाद - यूरिया बिना पैसे के कैसे खरीदे । अब तक किसान अपनी उपज को न बेच पाने और मोसम की बेईमानी के चलते कर्ज से लद गया है । जहां रायसेन जिले में पूर्व वर्ष धान का रकवा 30 हजार हेक्टेयर था और बम्पर फसल पैदा हुई थी । परंतु अब किसान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भाषण को भी भूल गया - किसानी लाभ का धंदा हैं लेकिन अब किसानी कर्ज का धंधा बन गया है जमीने बेचो या कर्ज लो तब जाकर खेती कर सकते है । आज हमने रायसेन जिले के उदयपुरा और बाड़ी विकासखंड में जाकर देखा तो जमीन में दरारें पड़ गई है । धान की पौध सूखने लगी है । कुछ किसानो का सहारा ट्यूबेल है तो पानी नही निकल रहा हैं । बही डेम भी खाली पड़े है तो नदिया नही सूख गई है । किसानों को कर्ज से मुक्ति के लिए मूँग ही एक सहारा था जिसे भी सरकार नही खरीद पा रही है । ऐसे में किसान दो राहे पर खड़ा है । किसान के लिए अब आगे कुआ पीछे खाई बाली कहावत नजर आ रही है । यूरिया ,खाद ,डीएपी भी किसान को उपलव्ध नही हो पा रही है । किसानों को अब आखरी उम्मीद है कि बारिश कब होगी । मौसम वैज्ञानिक डॉ एस एस तोमर ने फोन पर बताया कि 19-20 जून से बारिश हो सकती है ।धान की फसल नहर के पानी से तो लग जायेगी लेकिन बारिश नही हुई तो वर्वाद हो जायेगी । धान पानी की फसल है । बही कुछ किसानों के लिए नहर नही होने से परेशानी भी बढ़ गई । अब किसान राम भरोसे है । किसान का दुख कैसे दूर हो ।
पानी के इंतजार में किसान, सूखे से खेतो में आई दरारे
संक्षेप में
रायसेन जिले में इस बार धान का रकबा बढ़कर करीब 40 हजार हेक्टेयर होने की उम्मीद है, लेकिन बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। उदयपुरा और बाड़ी विकासखंड में कई खेतों में दरारें पड़ गई हैं और धान की पौध सूखने लगी है। किसानों का कहना है कि यदि मूंग समर्थन मूल्य पर बिक जाती तो धान की तैयारी में आर्थिक मदद मिलती, लेकिन उपज नहीं बिकने और मौसम की मार के कारण वे कर्ज के बोझ में दबते जा रहे हैं।
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