धर्मनगरी उज्जैन में श्रावण माह के दूसरे सोमवार को बाबा महाकाल की दूसरी सवारी धूमधाम और श्रद्धा के साथ निकली। पालकी में भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर और हाथी पर श्री मनमहेश स्वरूप में बाबा महाकाल नगर भ्रमण पर निकले। सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा और पूरा शहर ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा। मंदिर प्रबंध समिति के अनुसार करीब 7 लाख 80 हजार श्रद्धालुओं ने सवारी मार्ग पर बाबा महाकाल के दर्शन किए। इस दौरान आदिवासी भगोरिया लोकनृत्य और 50 नृत्यांगनाओं की नृत्यांजलि ने सवारी की भव्यता में चार चांद लगा दिए।बाबा महाकाल की सवारी से पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। मुख्य पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने षोडशोपचार पूजन कराया और भगवान की आरती की।इस दौरान संभागायुक्त आशीष सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, कलेक्टर एवं मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह और मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक सहित अन्य अधिकारियों ने भगवान का पूजन कर देश-प्रदेश की सुख-समृद्धि और विकास की कामना की।पूजन के बाद भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर पालकी में और श्री मनमहेश हाथी पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने बाबा महाकाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।सवारी के आगे श्री महाकालेश्वर बैंड, लोक कलाकार और जनजातीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देते हुए चल रहे थे। सवारी मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं ने ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष के साथ बाबा महाकाल पर पुष्प वर्षा की।बाबा महाकाल की सवारी गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंची। यहां भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर और श्री मनमहेश का क्षिप्रा नदी के जल से पूजन-अभिषेक किया गया। शंखनाद के बीच भगवान की आरती हुई।इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा और छत्री चौक होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची।गोपाल मंदिर में परंपरा के अनुसार सिंधिया स्टेट की ओर से पुजारी ने भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर का पूजन किया। इसके बाद सवारी पटनी बाजार और गुदरी चौराहा होते हुए पुनः महाकाल मंदिर पहुंची, जहां आरती के बाद सवारी का विश्राम हुआ।महाकाल की दूसरी सवारी में इस बार मध्यप्रदेश की जनजातीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। झाबुआ के पेटलावद क्षेत्र की रामलीला आदिवासी नर्तक मंडली ने भगोरिया लोकनृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी।ढोल-मांदल की थाप पर कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में पाली, चक्रीपाली और पिरामिड जैसी समूह नृत्य संरचनाएं प्रस्तुत कीं। कलाकारों की प्रस्तुति ने सवारी में शामिल श्रद्धालुओं को झाबुआ अंचल की समृद्ध लोक संस्कृति से रूबरू कराया।महाकाल मंदिर परिसर में प्रतिभा संगीत कला संस्थान और लोकायन संस्थान की करीब 50 नृत्यांगनाओं ने भगवान महाकाल की पालकी के सामने नृत्यांजलि अर्पित की।प्रतिभा रघुवंशी और प्रज्ञा गढ़वाल के मार्गदर्शन में नृत्यांगनाओं ने भगवान भोलेनाथ की आराधना नृत्य के माध्यम से की। रिमझिम बारिश के बीच मंदिर के बैंड की धुन पर नृत्य करती कलाकारों की प्रस्तुति श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रही।बाबा महाकाल की सवारी में शामिल नहीं हो पाने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रबंध समिति की ओर से एलईडी रथों की व्यवस्था की गई। सवारी के आगे और पीछे चल रहे एलईडी रथों पर सवारी का लाइव प्रसारण किया गया।फ्रीगंज, दत्त अखाड़ा क्षेत्र, त्रिवेणी द्वार सहित शहर के प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं ने चलित एलईडी रथों के जरिए बाबा महाकाल की सवारी के लाइव दर्शन किए।श्रावण के दूसरे सोमवार को उज्जैन पूरी तरह शिवमय नजर आया। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था, बाबा महाकाल के जयकारे, ढोल-डमरू की गूंज और लोक संस्कृति की प्रस्तुतियों ने महाकाल की दूसरी सवारी को यादगार बना दिया। अब बाबा महाकाल की तीसरी सवारी 17 अगस्त सोमवार को निकलेगी, जिसमें भगवान पालकी में चंद्रमोलेश्वर, हाथी पर मनमहेश और गरुड़ रथ पर शिवतांडव स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे।
बाबा महाकाल की भव्य सवारी
मध्य प्रदेश
