उदयपुर नगर निगम में मेयर पद के चुनाव को लेकर चल रहे खींचतान के बीच आखिरकार बीजेपी ने पारस सिंघवी के नाम पर मुहर लगा दी है। पार्टी ने डिप्टी मेयर पद के लिए दिनेश भट्ट को ऑफर दिया है। उनके इनकार करने की स्थिति में अशोक नागदा या जतिन श्रीमाली को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। नगर निगम कार्यालय में आज दोपहर 3 बजे तक नामांकन प्रक्रिया पूरी होनी है।
उदयपुर नगर निगम के 7 बोर्ड के इतिहास में यह पहला मौका है जब पार्टी को नामांकन के अंतिम तीन घंटों तक अपने महापौर प्रत्याशी के नाम पर माथापच्ची करनी पड़ी। आधा दर्जन से अधिक दिग्गजों के दावेदारी पेश करने की वजह से पार्टी के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ गई थी।
गुटबाजी और तीखी खींचतान का दौर
नामांकन से ठीक पहले तक बीजेपी के भीतर कई दौर की बैठकें चलीं। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह ने दिनेश भट्ट के नाम पर खुलकर विरोध जताया और प्रमोद सामर के पक्ष में अड़े रहे। दूसरी ओर, शहर विधायक ताराचंद जैन दिनेश भट्ट के समर्थन में खड़े नजर आए। विधायक जैन का तर्क था कि भट्ट पार्टी के पूर्व शहर जिलाध्यक्ष रह चुके हैं और ऐसे वरिष्ठ नेता को नजरअंदाज करने से कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश जाएगा।
विवाद को थामने के लिए पार्टी नेताओं ने आरएसएस के पदाधिकारियों तक पहुंच बनाने की भी कोशिश की, लेकिन संघ की ओर से निकाय चुनाव में किसी भी तरह के दखल से साफ इनकार कर दिया गया। स्थानीय संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच पसंद-नापसंद की इस रस्साकशी के बीच अंततः प्रदेश मुख्यालय से पारस सिंघवी के नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई।
कांग्रेस से पूनम कुंवर मैदान में
उधर, विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने शहर जिलाध्यक्ष फतेहसिंह राठौड़ की पत्नी पूनम कुंवर को अपना मेयर प्रत्याशी बनाया है। पूनम कुंवर ने दोपहर तक अपना नामांकन दाखिल कर दिया। कांग्रेस खेमे में भी प्रत्याशी के नाम को लेकर दोपहर 1 बजे तक मंथन का दौर चलता रहा, जिसके बाद यह नाम तय किया गया।
स्थानीय निकाय चुनाव की इस सरगर्मी के बीच पहली बार पार्षद बने जतिन श्रीमाली, कविता जोशी और अशोक नागदा के नाम भी चर्चाओं में बने रहे। जतिन श्रीमाली पूर्व जिलाध्यक्ष रवीन्द्र श्रीमाली के भतीजे हैं, जबकि कविता जोशी बीजेपी महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष रह चुकी हैं। फिलहाल बीजेपी में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजनीतिक समीकरणों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
