जासूसी और आतंकवाद की गंभीर पृष्ठभूमि पर बनी फिल्मों के बीच निर्देशक आकाश कौशिक ने एक अलग राह चुनी है। फिल्म ‘उड़ता तीर’ जासूसी की दुनिया को तनाव के बजाय हास्य के नजरिए से पेश करती है, जहां एक पाकिस्तानी जासूस अपनी ही खुफिया एजेंसी के खिलाफ खड़ा हो जाता है। फिल्म में आयुष्मान खुराना और सुहैल नैय्यर मुख्य भूमिकाओं में हैं, जो आतंकवाद और कॉमेडी के मेल से एक नया माहौल बनाते हैं।
याददाश्त का खेल और मिशन का बंटाधार
कथा का केंद्र बिंदु बिलाल अहमद (आयुष्मान खुराना) और उसका साथी अशफाक (सुहैल नैय्यर) हैं, जो पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव के रूप में भारत पहुंचते हैं। दोनों का मकसद काउंटर टेररिज्म स्क्वॉड यानी CTS में सेंध लगाना है। बिलाल ऑफिसर विक्रांत और अशफाक ध्रुव की फर्जी पहचान के साथ यूनिट में घुसपैठ कर लेते हैं। अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए बिलाल रक्षा मंत्रालय की कर्मचारी यामिनी (सारा अली खान) को अपने प्रेम जाल में उलझाता है।
लेकिन एक हादसे के बाद कहानी पलट जाती है। बिलाल कोमा से बाहर आने के बाद अपनी याददाश्त खो बैठता है और भूल जाता है कि वह किस देश का जासूस है। खुद को पूरी तरह भारतीय अफसर विक्रांत मानने वाले बिलाल पर देशभक्ति का ऐसा भूत सवार होता है कि वह देश में सक्रिय पाकिस्तानी आतंकियों को पकड़वाने लगता है।
इस परिस्थिति ने अशफाक को भारी संकट में डाल दिया है। उसे पता है कि बिलाल कौन है, लेकिन वह न तो अपने दोस्त को रोक पा रहा है और न ही अपने पाकिस्तानी आकाओं को कोई संतोषजनक जवाब दे पा रहा है। बिलाल की राष्ट्रभक्ति और अशफाक की लाचारी से पर्दे पर कई कॉमिक स्थितियां बनती हैं।
कलाकारों का अभिनय: कॉमिक टाइमिंग से सजी फिल्म
फिल्म की यूएसपी आयुष्मान खुराना का अभिनय है। अपनी असली पहचान भुला चुके जासूस की उधेड़बुन को आयुष्मान ने अपने हाव-भाव और कॉमिक टाइमिंग से दिलचस्प बनाया है। राहुल बोस CTS चीफ बर्मन के किरदार में बिना ज्यादा डायलॉग बोले सिर्फ आंखों और चेहरे के रिएक्शन से मजबूत छाप छोड़ते हैं।
अशफाक के रोल में सुहैल नैय्यर ने अच्छा साथ निभाया है। दिवंगत मुकुल देव आतंकी सरगना अजहर मकसूद के रूप में प्रभावी लगे हैं, जबकि राम कपूर (लेफ्टिनेंट जनरल नियाजी) और गुलशन ग्रोवर (मीर) अपने हिस्सों में ठीक-ठाक काम करते हैं। सारा अली खान और मौलाना की भूमिका में नजर आए रघुबीर यादव को स्क्रीन पर और अधिक जगह मिलने की गुंजाइश थी।
निर्देशन और संगीत: पहला हाफ मजबूत, दूसरा थोड़ा धीमा
आकाश कौशिक ने लेखन और निर्देशन दोनों की कमान संभाली है। फिल्म का पहला हिस्सा चुटीले संवादों और अनोखे प्रसंगों की वजह से तेजी से आगे बढ़ता है, जहां बिलाल का कन्फ्यूजन और अशफाक की बेबसी दर्शकों को हंसाती है। हालांकि, दूसरे भाग में फिल्म थ्रिलर और ट्विस्ट की तरफ मुड़ती है, जिससे कॉमेडी की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ जाती है। कुछ मोड़ दर्शकों को पहले ही समझ आ जाते हैं।
सचिन-जिगर का संगीत संतुलित है। अरिजीत सिंह की आवाज में सजा ‘चन्न’ गाना सुकून देता है, जबकि ‘जय हिंद’ और ‘चूज़े’ जैसे ट्रैक माहौल बनाने का काम करते हैं। बैकग्राउंड स्कोर और धर्मा प्रोडक्शंस के पुराने गानों का इस्तेमाल भी कहानी के मूड से मेल खाता है।
