प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि विकसित भारत के निर्माण के लिए जिस तरह की गवर्नेंस की जरूरत है, उसका मुख्य माध्यम संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) है। आयोग की चयन प्रक्रिया से गुजरने वाले युवाओं में दो बुनियादी कसौटियां होनी चाहिए— पहली 'नेशन फर्स्ट' और दूसरी 'सिटिजंस फर्स्ट'।
दिल्ली के भारत मंडपम में UPSC के 100 साल पूरे होने पर आयोजित शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने ये बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने आयोग के सौ साल के सफर पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन किया और एक शताब्दी स्मारक सिक्का तथा विशेष डाक टिकट भी जारी किया। दो दिवसीय यह कार्यक्रम 30 सितंबर से शुरू हुआ है, जिसमें देश भर के राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षाविद शामिल हुए हैं।
पायलट स्मित मच्छर के साहस का जिक्र
संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने फ्लाईदुबई की फ्लाइट को एक बड़े हादसे से बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित मच्छर का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के एक पायलट ने सूझबूझ से संभावित बड़ी दुर्घटना को टाल दिया, जिस पर आज पूरी दुनिया गर्व कर रही है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस घटना के बाद उन्होंने पायलट के माता-पिता से फोन पर बात कर उनकी सराहना की थी।
UPSC की सदी लंबी यात्रा का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सौ वर्षों में सरकारें बदलीं, तकनीक बदली और सिलेबस भी बदला, लेकिन इस संस्था के प्रति देश का भरोसा लगातार अटूट बना हुआ है। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर बनाई गई विशेष गैलरी का हवाला देते हुए याद किया कि साल 1920 में जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस इस चयन प्रक्रिया से गुजरे थे, तब अंग्रेजों के शासन में भी संस्कृत विषय का पेपर होता था और उन्होंने अपनी परीक्षा संस्कृत में ही दी थी।
