सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के देश को वैश्विक निवेश और पर्यटन का केंद्र बनाने के सपनों के सामने यमन का संघर्ष एक बार फिर बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया है। पिछले 11 वर्षों से इस सैन्य दलदल से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे रियाद को एक बार फिर हूती विद्रोहियों के हमलों का सामना करना पड़ रहा है।
ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने सऊदी शहरों, हवाई अड्डों और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। जानकारों के अनुसार, क्षेत्रीय साझेदारों के साथ रणनीतिक मतभेद और कूटनीतिक फैसलों में आई कमियों ने सऊदी अरब की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इस बीच, युद्धविराम टूटने के बाद से सऊदी सुरक्षा बलों और हूतियों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है।
यूएई से साझेदारी टूटने और रणनीतिक खालीपन का असर
यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ शुरुआती दौर में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहे थे। हालांकि, समय के साथ दोनों देशों के रणनीतिक हित टकराने लगे। मुख्य विवाद इस बात पर था कि संघर्ष के बाद यमन के भू-राजनीतिक भविष्य की कमान किसके हाथ में होगी।
सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार का समर्थन कर रहा है, जबकि यूएई दक्षिणी यमन में अलग राष्ट्र की मांग कर रहे ट्रांजिशन काउंसिल (STC) के साथ खड़ा है। 2025 के अंतिम महीनों में STC ने दक्षिणी यमन के कई रणनीतिक इलाकों पर नियंत्रण हासिल कर लिया। सीमा सुरक्षा खतरे में पड़ने की आशंका के चलते दिसंबर 2025 में सऊदी वायुसेना ने मुकल्ला बंदरगाह पर हवाई हमला कर दिया।
सऊदी प्रशासन का दावा था कि उस पोत पर यूएई से भेजे जा रहे हथियार उतारे जा रहे थे। इसके विपरीत, यूएई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जहाजों पर हथियार नहीं बल्कि यमन में तैनात उसके सैनिकों के लिए जरूरी रसद सामग्री थी। इस घटना के बाद दोनों खाड़ी देशों के बीच खटास इतनी बढ़ गई कि यूएई ने अपने सैनिकों को वापस बुला लिया।
यूएई के समर्थन से तैयार किए गए हजारों स्थानीय लड़ाके अपनी कमान से अलग हो गए। सऊदी अरब उन बलों की जगह वैसी मजबूत और एकीकृत व्यवस्था खड़ी करने में असफल रहा, जिससे हूतियों को अपनी पकड़ मजबूत करने का खुला मौका मिल गया।
तेहरान की घटनाओं और एयरपोर्ट विवाद से टूटा युद्धविराम
यूएई के साथ गठबंधन टूटने के बाद सऊदी अरब यमन में स्थिति संभालने की कोशिश कर ही रहा था कि अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस क्षेत्रीय संघर्ष ने रियाद की रणनीतिक योजनाओं को पूरी तरह उलझा दिया।
जुलाई में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने एक हूती प्रतिनिधिमंडल विमान से तेहरान गया था। वापसी के दौरान उन्हें निर्देश दिया गया कि वे यमन की राष्ट्रीय विमान सेवा का ही उपयोग करें और किसी ईरानी विमान से वापसी न करें।
इसके उलट, हूती अधिकारी ईरानी विमान को सीधे सना एयरपोर्ट पर उतारने पर अड़ गए। इस गतिरोध के बाद सरकार समर्थित बलों ने सना हवाई अड्डे के रनवे को बमबारी कर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया, ताकि वह विमान वहां लैंड न कर सके।
मजबूरी में उस विमान को अपना मार्ग बदलकर हूदैदाह हवाई अड्डे पर उतारना पड़ा। इस कार्रवाई से आक्रोशित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के साथ पिछले चार वर्षों से चल रहे औपचारिक युद्धविराम को समाप्त करने की घोषणा कर दी और नए सिरे से हमलों की शुरुआत कर दी।
