यमन के हूती विद्रोहियों ने शनिवार रात सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट को निशाना बनाकर बड़ा हमला किया। इस गोलाबारी और मिसाइल हमले में एक भारतीय नागरिक समेत 13 लोगों की जान चली गई, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। पिछले एक दशक में सऊदी की धरती पर हुआ यह सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है।
इस घटना के बाद सऊदी प्रशासन ने रियाद एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है। साथ ही विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि सऊदी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने वाले विमानों को बख्शा नहीं जाएगा।
घरेलू टर्मिनल पर भी हमला, एयरलाइंस ने रोकीं उड़ानें
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर रोक के अगले ही दिन यानी रविवार रात करीब 8:30 बजे हूती विद्रोहियों ने एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 और टर्मिनल-4 को फिर से हमलों की चपेट में ले लिया। इन दोनों टर्मिनलों से देश के भीतर की उड़ानें संचालित होती हैं।
एक चश्मदीद यात्री के अनुसार, रविवार रात एक गोला सीधे रनवे के पास आ गिरा, जहां कई विमान पार्क किए जा रहे थे। इस धमाके के बाद खड़े विमानों के पास आग लग गई। लगातार हो रहे इन हमलों के बाद एयर इंडिया, फ्लाईदुबई, लुफ्थांसा ग्रुप और पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) ने सऊदी अरब के लिए अपनी विमान सेवाएं अस्थायी तौर पर रोक दी हैं।
दशक का सबसे बड़ा हमला और भारत की प्रतिक्रिया
10 अक्टूबर को रियाद एयरपोर्ट पर हुआ यह हमला पिछले 10 वर्षों में सऊदी अरब पर हुआ सबसे भीषण हमला है। इससे पहले मई 2015 में कातिफ की एक शिया मस्जिद को निशाना बनाया गया था, जिसमें 21 लोगों की मौत हुई थी और उसकी जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने रियाद एयरपोर्ट पर हुए इस मिसाइल हमले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि आम नागरिकों और नागरिक ठिकानों को लगातार निशाना बनाया जाना अस्वीकार्य है और इस तरह की हिंसा तत्काल रुकनी चाहिए।
दूतावास की एडवाइजरी और हूतियों की चेतावनी
रियाद में स्थित भारतीय दूतावास ने सऊदी अरब में रह रहे सभी नागरिकों के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें भारतीयों को अत्यधिक सतर्क रहने, अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने और स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी गई है।
दूसरी ओर, हूती विद्रोहियों का कहना है कि वे यमन के गृहयुद्ध में सऊदी के सैन्य हस्तक्षेप के विरोध में ये कार्रवाई कर रहे हैं। विद्रोहियों ने साफ संकेत दिए हैं कि सऊदी अरब के विमानन ठिकानों को आगे भी निशाना बनाया जा सकता है, जिससे मध्य पूर्व में सुरक्षा संकट और गहरा गया है।
