आगरा के रामलला वृद्धाश्रम में उस वक्त माहौल बेहद भावुक हो गया, जब नारी शक्ति मिशन के तहत पहुंचे एसीपी हरिपर्वत और आईपीएस अधिकारी बजरंग प्रसाद से एक बुजुर्ग महिला लिपटकर फफक पड़ी। महिला ने कहा कि उसके बच्चों ने उसे छोड़ दिया है, और अब पुलिसकर्मी ही उनका सहारा बने हैं। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद पुलिस बल और आश्रम के अन्य लोग भी भावुक हो गए।
पुलिस की ओर से यह कार्यक्रम नारी शक्ति मिशन के तहत आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को जरूरी सामग्री और उपहार वितरित करना था। इस दौरान एसीपी हरिपर्वत आईपीएस बजरंग प्रसाद समेत कई अधिकारी वृद्धाश्रम पहुंचे थे और बुजुर्गों का हालचाल जान रहे थे। बातचीत के दौरान ही एक बुजुर्ग महिला ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए अधिकारी को गले लगा लिया।
आईपीएस बजरंग प्रसाद ने दी सांत्वना
महिला को रोता देख आईपीएस बजरंग प्रसाद ने उन्हें ढांढस बंधाया और हरसंभव मदद का भरोसा दिया। इस दौरान महिला पुलिसकर्मियों ने आश्रम में रह रही अन्य बुजुर्ग महिलाओं को भी उपहार और आवश्यक सामग्री बांटी। पुलिस के इस संवेदनशील व्यवहार से अभिभूत होकर बुजुर्गों ने अधिकारियों का आभार जताया और उन्हें सम्मानित किया।
यह पल आईपीएस अधिकारी के लिए भी व्यक्तिगत रूप से काफी मर्माहत करने वाला रहा। सामाजिक दायित्व के तहत पहुंचे अधिकारी के सामने जब बुजुर्ग महिला ने अपने बच्चों द्वारा ठुकराए जाने का दर्द बयां किया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
कौन हैं आईपीएस बजरंग प्रसाद?
उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के आईपीएस अधिकारी बजरंग प्रसाद वर्तमान में अपनी पहली पोस्टिंग पर आगरा में तैनात हैं। 2 सितंबर 1998 को यूपी के बस्ती जिले में जन्मे बजरंग ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2022 में 454वीं रैंक हासिल की थी। उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में यह सफलता पाई थी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएससी करने के बाद वे सिविल सेवा की तैयारी के लिए दिल्ली गए थे।
उनके जीवन का सबसे कठिन संघर्ष वर्ष 2020 में आया, जब जमीन विवाद के चलते उनके पिता राजेश कुमार यादव की हत्या कर दी गई। उस समय वह दिल्ली में यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी में जुटे थे और परीक्षा में कुछ ही दिन बाकी थे। कठिन पारिवारिक त्रासदी के बावजूद उनकी मां कुसुमलता ने उन्हें परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करने को कहा और उनकी पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए उन्हें अंतिम संस्कार में भी घर नहीं बुलाया।
पिता के हत्यारों को सजा और संघर्ष की कहानी
बजरंग प्रसाद के परिवार में उनकी मां और तीन भाइयों के अलावा उनकी बहन भारतीय सेना में सेवाएं दे रही हैं। तमाम संघर्षों और मुश्किल हालातों को पार करते हुए उन्होंने अपनी मेहनत जारी रखी और आईपीएस बने।
14 अगस्त 2026 को उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी थी कि बस्ती की एक अदालत ने उनके पिता की हत्या के मामले में सभी नौ दोषियों को 10-10 साल की कैद की सजा सुनाई है। अभाव और पारिवारिक त्रासदी के बाद भी हार न मानने वाली उनकी यह कहानी आज देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है।
