राजस्थान हाईकोर्ट से बीकानेर नगर निगम के महापौर चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्षद और पूर्व यूआईटी अध्यक्ष मकसूद अहमद को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने रविवार को अवकाश के दिन विशेष सुनवाई करते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। वार्ड 18 से निर्वाचित मकसूद अहमद ने पुराने मामले में पुलिस नोटिस और मतदान से रोके जाने की आशंका को लेकर कोर्ट का रुख किया था।
रविवार रात 10 बजे हुई विशेष सुनवाई
मामले की तात्कालिकता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर रविवार रात करीब 10 बजे जस्टिस सुनील बेनीवाल की पीठ ने विशेष सुनवाई की। करीब आधे घंटे चली इस सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य ने याचिकाकर्ता का पक्ष रखा।
याचिका में बताया गया कि कोटगेट थाना पुलिस की ओर से जारी पुराने नोटिस के चलते उन्हें सोमवार को होने वाले महापौर चुनाव में मतदान से वंचित किए जाने का खतरा था। इसी तत्काल स्थिति को आधार बनाते हुए अदालत से न्यायिक सुरक्षा की मांग की गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने यह अंतरिम राहत दी है।
प्रदेश के अन्य निकायों में भी राहत का दौर
बीकानेर के अलावा प्रदेश के अन्य नगर निकायों में होने वाले चुनावों से जुड़े मामलों पर भी राजस्थान हाईकोर्ट ने रविवार को सुनवाई की। हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों की याचिकाओं पर भी विशेष पीठ ने विचार किया।
कुचेरा नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष और निर्वाचित पार्षद तेजपाल मिर्धा को भी एसीबी के एक मामले में हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। वहीं, श्रीविजयनगर नगरपालिका के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सुशील मीढा उर्फ बिट्टू मीढा से जुड़े मामले में भी इसी तरह की राहत दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
273 निकायों में अध्यक्ष पद के लिए आज मतदान
राज्य के बीकानेर, पाली, अजमेर, उदयपुर और अलवर समेत 273 नगर निकायों में अध्यक्ष और महापौर पद के लिए सोमवार को मतदान होना है। बीकानेर नगर निगम के चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है।
आंकड़ों के मुताबिक बीकानेर में भाजपा के पास 27 और कांग्रेस के पास 42 पार्षद हैं। इसके अलावा पाली में भाजपा के 21 और कांग्रेस के 29 तथा अजमेर में भाजपा के 32 और कांग्रेस के 37 पार्षद हैं। हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद अब बीकानेर समेत अन्य निकायों में होने वाली मतदान प्रक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
