यमुना जल समझौते को लेकर राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक 32 साल बाद राजस्थान और हरियाणा के बीच 1994 के यमुना जल समझौते को लागू करने के लिए मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट यानी एमओए पर हस्ताक्षर हो गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस समझौते पर दस्तखत किए। भाजपा इसे राजस्थान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बता रही है। वहीं समझौते के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को उनका पुराना वादा याद दिलाया और कहा की मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के स्वागत समारोह में आने और उन्हें माला पहनाने का न्योता दिया है। दरअसल, गहलोत ने पहले कहा था कि जिस दिन राजस्थान को यमुना का पानी मिलेगा, वह खुद मुख्यमंत्री निवास जाकर मुख्यमंत्री का सम्मान करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि केवल समझौते पर हस्ताक्षर होने से बात पूरी नहीं होगी, बल्कि जब राजस्थान की धरती पर वास्तव में यमुना का पानी पहुंचेगा, तभी इसे पूरी सफलता माना जाएगा। वही भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी गहलोत से राजनीति से ऊपर उठकर अपना वादा निभाने की अपील की वहीं राजेंद्र राठौड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में यमुना का पानी दूसरे राज्यों को नहीं देने की बात कही थी, जबकि अब उसका रुख अलग नजर आ रहा है। ऐसे में यमुना जल समझौते के साथ-साथ राजस्थान की सियासत भी पूरी तरह गर्मायी हुई है और अब सभी की नजर अशोक गहलोत की अगली प्रतिक्रिया पर है।
अब माला पहनाने आइए —गहलोत को भाजपा ने दिया न्योता
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